April 30, 2026

सावन में बरस रहा कहर: बारिश से राहत भी, आफत भी! मौसम विभाग ने चेताया – अब संभल जाइए

देशभर में सावन के महीने ने एक ओर जहां मौसम को सुहाना बना दिया है, वहीं दूसरी ओर भारी बारिश से अब कई राज्यों में आफत की स्थिति बन गई है। भारतीय मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि आने वाले घंटों में देश के कई हिस्सों में तेज बारिश, आंधी और तूफान का खतरा है। बारिश से लोगों को गर्मी से राहत जरूर मिली है, लेकिन इसके साथ ही बाढ़, भूस्खलन और बिजली गिरने की घटनाओं से कई इलाकों में डर और चिंता का माहौल बना हुआ है।

मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में तेज बारिश हो सकती है। दिल्ली में आने वाले एक सप्ताह तक बादल छाए रहेंगे और हल्की बारिश होती रहेगी। उधर, महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड में भी मानसून के चलते नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। बंगाल, असम, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और मेघालय जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में अगले 24 घंटे बेहद भारी हो सकते हैं।

इस बार का मानसून कई राज्यों में बाढ़ लेकर आया है। असम, मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा, मणिपुर, सिक्किम, उत्तराखंड, कर्नाटक, बंगाल, गुजरात और हिमाचल प्रदेश बाढ़ की चपेट में हैं। खासकर हिमाचल प्रदेश की हालत सबसे गंभीर है, जहां अब तक 105 लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य के कई हिस्सों में सड़कें धंस गई हैं, पुल टूट गए हैं और भूस्खलन की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। प्रशासन ने लोगों को पहाड़ी इलाकों की यात्रा टालने की सलाह दी है।

उत्तर प्रदेश और बिहार में आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं में इजाफा हुआ है। पहाड़ी क्षेत्रों में बादल फटने और भूस्खलन की आशंका मौसम वैज्ञानिकों ने जताई है। वहीं झारखंड, राजस्थान और लद्दाख जैसे राज्यों में इस बार सामान्य से कहीं अधिक वर्षा दर्ज की गई है। झारखंड में जहां 71% अधिक वर्षा हुई है, वहीं राजस्थान में 116% ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। लद्दाख में भी औसतन 8 मिमी के मुकाबले 15.8 मिमी बारिश हो चुकी है, जो 97% की वृद्धि को दर्शाता है।

केंद्रीय मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार देश में 1 जून से 16 जुलाई तक कुल 331.9 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य के मुकाबले लगभग 9% अधिक है। लेकिन औसत आंकड़ों के पीछे राज्यों में भारी असंतुलन छिपा है। मध्य प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, ओडिशा और दमन-दीव में भी सामान्य से 20% से 60% तक अधिक वर्षा दर्ज की गई है। वहीं कुछ राज्य जैसे पंजाब, केरल और तमिलनाडु में सामान्य से कम बारिश रिकार्ड की गई है।

भारत में खेती largely मानसून पर निर्भर है। देश की 42% आबादी की आजीविका इसी पर टिकी है और जीडीपी में इसका बड़ा योगदान है। ऐसे में मानसून की अनिश्चितता और असामान्यता कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकती है। फसलों के साथ-साथ पीने के पानी और बिजली उत्पादन के लिए जरूरी जलाशयों पर भी इसका असर पड़ता है। इस बार की असामान्य बारिश ने एक बार फिर से मानसून पर हमारी निर्भरता और सतर्कता की अहमियत को सामने ला दिया है।

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