कैलास यात्रा पार्ट-11: आस्था की ऊंचाइयों से संकट की घाटियों तक, खजूर में अटका जत्था
कैलास मानसरोवर यात्रा का 11वां पड़ाव श्रद्धा, संकट और साहस का अनूठा संगम रहा। आस्था की ऊंचाइयों से लौटते समय जब सभी यात्रियों को हेलीकॉप्टर से नेपालगंज तक पहुंचना था, तभी तकनीकी खराबी ने यात्रियों को बीच रास्ते में खजूर गांव के पास जबरन उतरने पर मजबूर कर दिया।
हेलीकॉप्टर का ईंधन संकेतक खराब था, जिससे टैंक खाली दिख रहा था जबकि वह भरा हुआ था। सुरक्षा अलार्म बजने के बाद फोर्स लैंडिंग करनी पड़ी। यह एक सुनसान, असुविधाजनक जगह थी, जहां न रुकने का इंतजाम था, न मोबाइल नेटवर्क।
नेपाल सेना के एक सिपाही ने मदद की कोशिश की, और संचार के जरिए ATC से संपर्क कर पता चला कि रेस्क्यू हेलीकॉप्टर भेजा जा रहा है। जब तक हेलीकॉप्टर आया, यात्रियों की आंखें आसमान पर टिकी रहीं। रेस्क्यू पायलट आया, लेकिन उसके व्यवहार और गंध से यात्री और भी घबरा गए—शंका हुई कि वह नशे की हालत में है। फिर भी अंततः नेपालगंज सुरक्षित लैंडिंग हुई।
यात्रा का यह पड़ाव सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि एक अंतर्द्वंद्व और विश्वास की परीक्षा भी थी। लेखक हेमंत शर्मा की आत्मा अब भी कैलास में बसी है — वह अनुभव शब्दों से परे था, और एहसास अब भी जीवित है।
जय भोलेनाथ!
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