May 1, 2026

सलमान खान की ये 5 गलतियां कर सकती हैं ‘बैटल ऑफ गलवान’ को फ्लॉप, अगर अब भी नहीं संभले तो खतरे में पड़ सकता है स्टारडम

सलमान खान बॉलीवुड के उन सितारों में से हैं जो दशकों से अपनी खास फैन फॉलोइंग और स्क्रीन प्रेजेंस के दम पर इंडस्ट्री में टॉप पर बने हुए हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों से उनकी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पा रही हैं। ‘टाइगर 3’ और ‘सिकंदर’ जैसी बड़ी फिल्मों से 1000 करोड़ क्लब में एंट्री की उम्मीदें थीं, लेकिन दोनों ही फिल्में अपेक्षा पर खरी नहीं उतरीं। अब सलमान एक और बड़ी फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ लेकर आ रहे हैं, लेकिन इस बार उन्हें अपनी पिछली 5 बड़ी गलतियों से बचना होगा।

1. इमोशनल कहानी से दूरी बनाना

सलमान खान की फिल्मोग्राफी पर नजर डालें तो ‘हम आपके हैं कौन’, ‘बजरंगी भाईजान’, ‘हम दिल दे चुके सनम’ जैसी इमोशनल और फैमिली ड्रामा फिल्मों ने जबरदस्त कमाई की है। लोगों को उनका मासूम और भावुक किरदार खूब भाता है। लेकिन हाल के वर्षों में सलमान इस भावुक शैली से दूर हो गए हैं और एक्शन या फ्रेंचाइजी फिल्मों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। ‘बैटल ऑफ गलवान’ में अगर वे एक गहरे, मानवीय भावों से जुड़ा किरदार निभाएं, तो यह उनके करियर को फिर से नई ऊंचाइयों पर पहुंचा सकता है।

2. फ्रेश स्क्रिप्ट और नई कहानियों से दूरी

बार-बार रीमेक और सीक्वल फिल्में करने से सलमान खान का कंटेंट दोहराव का शिकार हो गया है। दर्शकों को आज के दौर में नई कहानियां और ताजगी चाहिए। ‘बैटल ऑफ गलवान’ जरूर एक अलग विषय लगता है, लेकिन इस टाइटल पर एक पुरानी फिल्म पहले ही मौजूद है। ऐसे में सलमान को न सिर्फ स्क्रिप्ट का ध्यान रखना होगा, बल्कि यह सुनिश्चित करना होगा कि फिल्म की कहानी दर्शकों को नया अनुभव दे।

3. डायरेक्टर्स के काम में दखल देना

सलमान के करियर में कई बार देखा गया है कि वे अपने डायरेक्टर्स के विजन में दखल देते हैं। इससे न सिर्फ फिल्म की गुणवत्ता प्रभावित होती है, बल्कि कई बार प्रोजेक्ट ही ठप हो जाता है। ‘इंशाअल्लाह’ इसका बड़ा उदाहरण है, जो संजय लीला भंसाली के साथ उनकी ट्यूनिंग न बनने की वजह से बंद हो गई। उन्हें यह समझना होगा कि एक डायरेक्टर फिल्म की आत्मा होता है, और उसे पूरी छूट देना जरूरी है।

4. उम्र के मुताबिक रोल न चुनना

59 साल की उम्र में सलमान अब भी 30-40 साल के किरदार निभा रहे हैं, जो दर्शकों को अब जमता नहीं है। आज के दर्शक कहानी में यथार्थ और लॉजिक तलाशते हैं। अजय देवगन की तरह अगर सलमान भी अपनी उम्र के हिसाब से किरदार चुनें तो यह उनके अभिनय को ज्यादा विश्वसनीय बनाएगा। उन्हें ‘फैमिली मैन’ जैसे गंभीर किरदार निभाने से हिचकना नहीं चाहिए।

5. हीरोइन के चयन में असंतुलन

सलमान की फिल्मों में अक्सर उनसे बहुत छोटी उम्र की हीरोइनों को कास्ट किया जाता है, जिससे उनकी जोड़ी असंतुलित लगती है। चाहे दिशा पटानी हो या रश्मिका मंदाना, दर्शकों को यह मेल नहीं बैठती। इसके बजाय अगर सलमान स्क्रिप्ट के मुताबिक परिपक्व या उम्र के करीब हीरोइन का चुनाव करें तो उनकी ऑन-स्क्रीन जोड़ी ज्यादा सहज और विश्वसनीय लगेगी। शाहरुख खान ने ‘डियर जिंदगी’ में यह उदाहरण पेश किया है।

निष्कर्ष
‘बैटल ऑफ गलवान’ सलमान खान के करियर की एक और बड़ी परीक्षा हो सकती है। अगर वे अपनी पुरानी गलतियों से सबक लें, डायरेक्टर पर विश्वास करें, उम्र के अनुसार रोल चुनें और दमदार स्क्रिप्ट का चयन करें, तो यह फिल्म उन्हें फिर से बॉक्स ऑफिस के सिंहासन पर बैठा सकती है। वरना उनकी स्टारडम वाकई खतरे में पड़ सकती है।

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