अमेरिका-भारत के बीच अंतरिम व्यापार समझौता तय! 20% से अधिक टैरिफ नहीं लगाने पर बनी सहमति
अमेरिका और भारत के बीच अंतरिम व्यापार समझौते की दिशा में अहम प्रगति हुई है, जिसके तहत अमेरिका भारत से आयात होने वाले उत्पादों पर 20% से अधिक टैरिफ नहीं लगाएगा। यह दर अन्य एशियाई देशों जैसे वियतनाम और फिलीपींस के मुकाबले कम मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच यह डील लगभग तय हो चुकी है, और आने वाले दिनों में इसके औपचारिक ऐलान की संभावना है।
भारत के लिए राहत, अमेरिका के रुख में नरमी
जहां अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जापान, कोरिया और अन्य कई देशों पर 25% से ज्यादा का टैरिफ लगाया है, वहीं भारत के खिलाफ न तो कोई टैरिफ लेटर जारी हुआ है, न ही कोई सख्त फैसला आया है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत और अमेरिका के बीच यह समझौता भारत को ट्रेड वार के खतरे से बचा सकता है और भविष्य में व्यापक व्यापार समझौते की राह को आसान बना सकता है।
क्या होगा टैरिफ स्ट्रक्चर?
सूत्रों के मुताबिक, इस समझौते में बेसलाइन टैरिफ 20% तक तय किया जा सकता है। यह दर अभी निर्धारित 26% के मुकाबले कम होगी, लेकिन दोनों पक्षों को भविष्य में इसे संशोधित करने की छूट होगी। हालांकि इस अंतरिम समझौते के लागू होने की कोई निश्चित डेडलाइन नहीं है।
ट्रंप की शर्तें और भारत का रुख
ट्रंप प्रशासन कई व्यापारिक साझेदारों को 50% तक की दर से टैरिफ लगाने की चेतावनी दे चुका है। भारत ने भी जवाब में अपनी सर्वश्रेष्ठ पेशकश अमेरिका के सामने रख दी है। हालांकि, कुछ मुद्दों पर अब भी मतभेद बने हुए हैं, खासकर जेनेटिकली मोडिफाइड (GM) फसलों पर बाजार खोलने को लेकर। भारत ने किसानों की सुरक्षा का हवाला देते हुए इस मांग को ठुकरा दिया है।
वियतनाम से बेहतर डील की कोशिश
भारत इस बात की कोशिश में है कि उसकी डील वियतनाम की तुलना में ज्यादा फायदेमंद हो, जिसने पहले ही 20% टैरिफ के साथ समझौता किया है। जबकि वियतनाम अब भी इस दर को कम कराने की कोशिश कर रहा है। ब्रिटेन के बाद भारत, अमेरिका से ऐसा समझौता करने वाला दूसरा देश बन सकता है।
ट्रंप की चेतावनी और ब्रिक्स विवाद
ट्रंप ने हाल ही में भारत के साथ डील होने की बात तो कही थी, लेकिन BRICS समूह में भारत की भागीदारी को लेकर अतिरिक्त शुल्क लगाने की धमकी भी दी। हालांकि, भारत इस डील को लेकर गंभीर है और भारतीय वार्ताकारों का एक उच्चस्तरीय दल जल्द ही वॉशिंगटन जाकर बातचीत को अंतिम रूप दे सकता है।
भारत और अमेरिका के बीच बन रही यह डील न सिर्फ व्यापार संतुलन को बेहतर करेगी, बल्कि दोनों देशों के रिश्तों में नया मोड़ ला सकती है। अगर 20% टैरिफ पर सहमति होती है, तो भारत को न केवल वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिलेगी, बल्कि यह आने वाले व्यापक व्यापार समझौते की नींव भी रखेगा। हालांकि, GM फसल और दवा नियमन जैसे मुद्दे अब भी बातचीत की टेबल पर चुनौती बने हुए हैं।
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