आज समाप्त हो रही है जगन्नाथ यात्रा, भगवान जगन्नाथ करेंगे अपने मंदिर वापसी का ‘बाहुड़ा’ पर्व
पुरी में भक्तिभाव और परंपरा से सराबोर माहौल में आज भगवान जगन्नाथ अपने मंदिर वापस लौटेंगे। गुंडिचा मंदिर में 9 दिनों के दिव्य विश्राम के बाद भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ श्रीमंदिर लौटेंगे। यह वापसी यात्रा ‘बाहुड़ा’ के नाम से जानी जाती है, जो रथ यात्रा की वापसी प्रक्रिया है।
‘बाहुड़ा’ का मतलब और इसका महत्व
‘बाहुड़ा’ ओड़िया भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है ‘वापसी’। यह वह दिन है जब भगवान गुंडिचा मंदिर से अपने मूल मंदिर वापस आते हैं। यह केवल एक यात्रा नहीं बल्कि श्रद्धालुओं के लिए आत्मा से जुड़ने का एक पावन पर्व है। लाखों श्रद्धालु ‘हरि बोल’ के नारे लगाते हुए भगवान के रथों के साथ ग्रांड रोड पर दिखाई देंगे।
यात्रा की रस्में और कार्यक्रम
सुबह 4 बजे से मंगला आरती के साथ दिन की शुरुआत हुई। इसके बाद रोजा होम, अबकाश, सूर्य देव पूजा, द्वारपाल पूजा जैसे कई पारंपरिक अनुष्ठान संपन्न हुए।
दोपहर करीब 12 बजे ‘पहंडी’ रस्म शुरू होगी, जिसमें भगवानों को रथ तक लाया जाएगा। इस दौरान गजपति महाराज दिव्यसिंह देव ‘छेरा पहंरा’ कर सोने की झाड़ू से रथों की सफाई करेंगे, जो समर्पण और समानता का प्रतीक है।
शाम 4 बजे से भक्त रथ खींचना शुरू करेंगे, क्रमशः भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ के रथ।
मौसी मां के मंदिर में विराम
रथ यात्रा के दौरान भगवान रथों के साथ अर्धासनी मंदिर (मौसी मां का मंदिर) पर थोड़ी देर रुकेंगे, जहां उन्हें पारंपरिक ‘पोड़ा पीठा’ मिठाई चढ़ाई जाएगी।
सुरक्षा इंतजाम
भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए पुरी शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि यह पावन पर्व शांतिपूर्वक संपन्न हो सके।
यह ‘बाहुड़ा’ यात्रा श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक आनंद और भावपूर्ण समर्पण का अवसर है, जो भगवान जगन्नाथ की परंपरा को जीवित रखती है।
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