सावधान! मोतियाबिंद सिर्फ उम्र का खेल नहीं – बच्चों में भी हो सकता है कैटरैक्ट, मिथकों से बढ़ रही लापरवाही
जून: आपकी आंखों की रक्षा का महीना
जून का महीना, कैटरैक्ट अवेयरनेस का महीना, आंखों से जुड़ी बीमारियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने का अनुकूल समय है। मोतियाबिंद, जो दुनिया भर में अंधेपन का प्रमुख कारण है, भारत में दो तिहाई ब्लाइंडनेस मामलों के लिए जिम्मेदार माना जाता है। समय रहते इस बीमारी का पता लगाना और सर्जरी कराना बेहद जरूरी है, क्योंकि देर होने पर उपचार के परिणाम प्रभावित हो सकते हैं।
मोतियाबिंद को लेकर गलतफहमी: केवल बुजुर्गों की बीमारी?
कई लोगों का मानना है कि मोतियाबिंद केवल उम्र बढ़ने के साथ आता है, लेकिन यह सच नहीं है। डॉ. महिपाल सिंह सचदेव, चेयरमैन एवं मेडिकल डायरेक्टर (सेंटर फॉर साइट ग्रुप ऑफ आई हॉस्पिटल्स) बताते हैं कि मोतियाबिंद के कारणों में उम्र बढ़ना तो आम है, पर इसके अलावा डायबिटीज, धूम्रपान, अल्ट्रावॉयलेट किरणों से लगातार संपर्क, आंखों की चोट, और लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं का सेवन भी शामिल हैं। यहां तक कि बच्चों में भी मोतियाबिंद हो सकता है, लेकिन मिथकों के चलते लोग सही समय पर इलाज नहीं कराते और लापरवाही बरतते हैं।
मोतियाबिंद से जुड़ी भ्रांतियाँ और उनका असर
भारत में मोतियाबिंद ब्लाइंडनेस का प्रमुख कारण होने के बावजूद, कई मिथक लोगों में गलत धारणा पैदा कर देते हैं। कुछ का यह मानना है कि कैटरैक्ट को आई ड्रॉप्स, डाइट या एक्सरसाइज से ठीक किया जा सकता है, जबकि वैज्ञानिक प्रमाण बताते हैं कि इसका उपचार केवल सर्जरी द्वारा ही संभव है। साथ ही यह भी ग़लत सोच है कि जब तक नजर काफी कमजोर न हो जाए, तब तक सर्जरी करानी जरूरी नहीं। सही समय पर की गई सर्जरी से इलाज के नतीजे बेहतर होते हैं और जल्दी स्वस्थ होने की संभावना बढ़ जाती है।
कैटरैक्ट की सर्जरी: आधुनिक तकनीक का चमत्कार
आज के मेडिकल फील्ड में कैटरैक्ट सर्जरी अत्यंत सुरक्षित मानी जाती है। लोकल एनेस्थीसिया में की जाने वाली यह प्रक्रिया दर्द रहित होती है और मरीज जल्दी ही ठीक हो जाता है। आधुनिक इन्ट्राऑकुलर लेंस (IOL) जैसे एक्सटेंडेड डेप्थ ऑफ फोकस (EDOF) लेंस दूर और पास दोनों की बेहतरीन दृष्टि प्रदान करते हैं, जिससे कई बार लोगों को चश्मे की आवश्यकता भी कम पड़ जाती है।
निष्कर्ष
मोतियाबिंद, जो भारत में अंधेपन का एक बड़ा कारण है, उसे लेकर फैले मिथक अक्सर लोगों में लापरवाही पैदा कर देते हैं। इसलिए जरूरी है कि हर उम्र के लोग—चाहे वे बच्चे हों या बुजुर्ग—इस बीमारी के बारे में सही जानकारी रखें और समय रहते डॉक्टर की सलाह लेकर उपचार करवाएं। अपनी आंखों की देखभाल आज ही शुरू करें, ताकि कल की दुनिया रोशन रहे।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या उपचार के लिए डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
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