April 21, 2026

वैष्णो देवी में मूसलधार बारिश से भूस्खलन, मंदिर तक जाने का रास्ता बंद!

जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में त्रिकुटा पहाड़ियों पर स्थित माता वैष्णो देवी धाम की यात्रा एक बार फिर मौसम की मार झेल रही है। सोमवार को दोपहर के समय अचानक मौसम ने करवट ली और तेज़ बारिश शुरू हो गई। करीब ढाई घंटे तक जारी मूसलधार बारिश के कारण हिमकोटी मार्ग पर सत्या व्यू पॉइंट के पास भारी भूस्खलन हो गया। इस घटना ने यात्रा में बाधा डाल दी और नए ट्रैक से आवाजाही को पूरी तरह रोक दिया गया। भूस्खलन के कारण बैटरी कार मार्ग पूरी तरह मलबे, कीचड़ और पत्थरों से पट गया, जिससे बैटरी कार सेवा तत्काल प्रभाव से बंद कर दी गई।

इस प्राकृतिक आपदा की वजह से वैष्णो देवी भवन से भैरव घाटी तक चलने वाली केबल कार सेवा भी स्थगित कर दी गई। प्रतिकूल मौसम के कारण यह लगातार पांचवा दिन था जब हेलीकॉप्टर सेवाएं भी नहीं चल सकीं। हालांकि पारंपरिक पैदल मार्ग पूरी तरह खुला रहा और यात्रियों की आवाजाही उसमें जारी रही। श्रद्धालु घोड़े, पिट्ठू, पालकी या पैदल माता के दर्शन के लिए आगे बढ़ते देखे गए। गनीमत यह रही कि भूस्खलन के समय सत्या व्यू पॉइंट पर कोई श्रद्धालु मौजूद नहीं था, जिससे जानमाल का नुकसान नहीं हुआ।

भूस्खलन की खबर मिलते ही श्राइन बोर्ड ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मशीनरी और कर्मचारियों को मलबा हटाने के काम में लगा दिया। बताया गया है कि भूस्खलन का मलबा करीब तीस फीट तक फैला हुआ है, जिसकी सफाई का काम लगातार जारी है। बोर्ड के अधिकारियों ने जानकारी दी कि जल्द ही बैटरी कार सेवा को बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। आपदा प्रबंधन दल के साथ-साथ श्राइन बोर्ड, पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों को यात्रा मार्ग पर तैनात किया गया है, जो हर स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। श्रद्धालुओं को सावधानी बरतने, भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में न रुकने और केवल अधिकृत मार्गों से ही यात्रा जारी रखने की सलाह दी जा रही है।

इस सब के बीच माता के भक्तों की आस्था डगमगाई नहीं है। तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद लोग ‘जय माता दी’ के जयकारों के साथ अपने परिवार और मित्रों सहित यात्रा कर रहे हैं। श्राइन बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार 22 जून को 34,717 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जबकि सोमवार शाम चार बजे तक 18,800 से अधिक लोगों ने पंजीकरण कर अपनी यात्रा शुरू कर दी थी। श्रद्धालुओं की संख्या में कमी नहीं आई है, जो इस बात का प्रमाण है कि श्रद्धा मौसम की सीमाओं को नहीं मानती।

इसी तरह की एक और घटना उत्तराखंड में भी सामने आई, जहां यमुनोत्री धाम के नौ कैंची क्षेत्र में भूस्खलन हुआ। इसमें एक श्रद्धालु घायल हो गया, जिसे जानकीचट्टी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस घटना पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि सभी राहत एजेंसियां मौके पर मौजूद हैं और तेजी से कार्य कर रही हैं। SDRF, NDRF, पुलिस, वन विभाग और मेडिकल टीमें राहत कार्य में जुटी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावितों की कुशलता की प्रार्थना करता हूं और राज्य सरकार हर संभव सहायता प्रदान कर रही है।

इन घटनाओं ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि बारिश के मौसम में पहाड़ी तीर्थ यात्राएं अत्यधिक संवेदनशील हो जाती हैं। यात्रियों को प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना आवश्यक है। मौसम की अनिश्चितता के बीच श्रद्धा की अडिगता भारतीय संस्कृति और आस्था की एक विशिष्ट पहचान है, जो तमाम कठिनाइयों के बावजूद यात्रियों को मां वैष्णो देवी और अन्य तीर्थ स्थलों की ओर खींच लाती है।

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