May 6, 2026

उपभोक्ता मामलों में रिफंड पर ब्याज भी मुआवजे के समान: एनसीडीआरसी का अहम फैसला

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने उपभोक्ता मामलों में रिफंड के साथ ब्याज को भी मुआवजे का एक रूप मानते हुए बिल्डर्स को सेवा में कमी के लिए जिम्मेदार ठहराया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ता को रिफंड देना हो तो वह ब्याज समेत देना होगा, क्योंकि यह उपभोक्ता को हुई असुविधा की भरपाई है।

यह फैसला जस्टिस सुदीप अहलूवालिया और साधना शंकर की बेंच ने एक अपील की सुनवाई के दौरान सुनाया। यह अपील बिल्डर द्वारा पंजाब राज्य उपभोक्ता आयोग के उस आदेश के खिलाफ की गई थी जिसमें उसे सेवा में लापरवाही का दोषी ठहराकर उपभोक्ता को रिफंड, मुआवजा और कानूनी खर्च चुकाने का निर्देश दिया गया था।

राज्य आयोग ने बिल्डर को 12 फीसदी ब्याज के साथ ₹34,27,747 लौटाने, ₹1 लाख मुआवजे के रूप में और ₹11,000 मुकदमेबाजी लागत के तौर पर भुगतान करने को कहा था। हालांकि राष्ट्रीय आयोग ने अंतिम आदेश में मुआवजे की राशि को अलग रखते हुए केस की लागत को बढ़ाकर ₹40,000 कर दिया।

मामला साल 2011 का है जब शिकायतकर्ताओं ने चंडीगढ़-अंबाला हाईवे पर बरनाला बिल्डर्स की एक परियोजना में फ्लैट बुक कराया था। विज्ञापनों में यह दावा किया गया था कि फ्लैट पूरी तरह तैयार हैं और किसी भी तरह का कानूनी पेंच नहीं है। उन्होंने फ्लैट की कीमत का अधिकांश भुगतान भी कर दिया था।

बिल्डर ने पहले खरीदारों को एग्रीमेंट पेपर नहीं दिए और बाद में कई अनुचित शर्तों के साथ एग्रीमेंट थमा दिया। इसके साथ ही बिना उचित आधार के सेवा कर की मांग की गई। ₹34 लाख से अधिक भुगतान करने के बावजूद खरीदारों को केवल एक कागजी कब्जा पत्र दिया गया, जबकि फ्लैट में विकास कार्य, यूटिलिटी कनेक्शन और कानूनी प्रमाणपत्र मौजूद नहीं थे।

जब शिकायतकर्ताओं ने रिफंड की मांग की, तो बिल्डर ने इसे जब्त करने की धमकी दी। इसके बाद उन्होंने 2014 में पंजाब राज्य आयोग में शिकायत दर्ज कराई। 2016 में आयोग ने बिल्डर को दोषी मानते हुए रिफंड, ब्याज, मुआवजा और कानूनी खर्च चुकाने का आदेश दिया।

अपील में बिल्डर ने कहा कि फ्लैट तैयार था, अधिकांश खरीदार उसमें रहने लगे थे और शिकायतकर्ता ने भुगतान में देरी की थी। उन्होंने यह भी कहा कि सेवा कर कानून के तहत देय था और पहले कभी इस पर आपत्ति नहीं जताई गई थी।

हालांकि, राष्ट्रीय आयोग ने अपने आदेश में दो टूक कहा कि उपभोक्ता मामलों में रिफंड के साथ ब्याज देना भी मुआवजे का एक स्वरूप है। यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी नजीर माना जा रहा है।

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