May 6, 2026

एथनॉल उत्पादन में ग्रेनस्पैन का बड़ा निवेश, गुजरात में दो संयंत्रों पर 520 करोड़ खर्च, हरित ईंधन आपूर्ति की दिशा में अहम पहल

गुजरात के अहमदाबाद में एथनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए ग्रेनस्पैन न्यूट्रिएंट्स प्राइवेट लिमिटेड ने दो नए अनाज आधारित एथनॉल संयंत्र स्थापित किए हैं। कंपनी ने इन दोनों संयंत्रों पर कुल 520 करोड़ रुपये का निवेश किया है और ये अब पूरी तरह से संचालित हो चुके हैं।

संयंत्रों की विशेषताएं और उत्पादन क्षमता

कंपनी के पहले संयंत्र की शुरुआत मई 2023 में अहमदाबाद के भामसरा गांव में हुई थी। इसकी उत्पादन क्षमता 110 किलोलीटर प्रतिदिन है और यह गुजरात का पहला अनाज आधारित एथनॉल संयंत्र था।

दूसरे संयंत्र की शुरुआत पिछले महीने हुई है, जिसकी क्षमता 240 किलोलीटर प्रतिदिन है और इस पर 360 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

दोनों संयंत्र मक्का और चावल को फीडस्टॉक के रूप में इस्तेमाल करते हैं।

कुल मिलाकर अब कंपनी की दैनिक उत्पादन क्षमता 350 किलोलीटर हो चुकी है।

केंद्र की योजनाओं से मिला लाभ

ग्रेनस्पैन ने केंद्रीय खाद्य मंत्रालय की ब्याज सब्सिडी योजना का लाभ उठाकर पहला संयंत्र स्थापित किया था, जिसके लिए 120 करोड़ का कर्ज लिया गया।

दूसरे संयंत्र को बिना किसी सरकारी ब्याज सब्सिडी के लगाया गया है।

कंपनी अब एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम (EBP) के तहत पेट्रोलियम विपणन कंपनियों (OMCs) को हरित ईंधन की आपूर्ति कर रही है।

आने वाले वर्षों में बढ़ेगी आय

ग्रेनस्पैन के सीएफओ पंकित शाह के अनुसार, कंपनी 2024-25 की एथनॉल आपूर्ति अवधि में 72 रुपये प्रति लीटर की दर से 8 करोड़ लीटर एथनॉल की आपूर्ति करेगी, जिससे कंपनी को 800 करोड़ रुपये से अधिक की आय होने की उम्मीद है।

अगली आपूर्ति अवधि में यह मात्रा 12 करोड़ लीटर तक पहुंच सकती है।

ग्रेनस्पैन ने खाद्य उत्पादों के क्षेत्र में 2014 से काम शुरू किया था और अब एथनॉल उत्पादन को भविष्य के बड़े अवसर के रूप में देख रही है।

क्या बोले ग्रेनस्पैन के CEO

सीईओ मनोज खंडेलवाल ने कहा कि, “एथनॉल उत्पादन न केवल भारत की ईंधन जरूरतों को पूरा कर सकता है, बल्कि भविष्य में इसका निर्यात भी संभव है। केंद्र सरकार की योजनाओं की बदौलत ही हम राज्य में ऐसा संयंत्र लगाने वाली पहली कंपनी बन सके।”

ग्रेनस्पैन का यह निवेश भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता, क्लीन एनर्जी की दिशा और स्थानीय उत्पादन को प्रोत्साहन देने की दिशा में एक अहम कदम है, जो भविष्य में एथनॉल आधारित इकोनॉमी के विस्तार का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

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