May 6, 2026

WPI महंगाई दर में बड़ी गिरावट: मई में घटकर 0.39% पर आई, सब्जियों की कीमतों में भारी गिरावट

मई 2025 में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति घटकर 0.39% पर आ गई, जो अप्रैल में 0.85% थी और पिछले साल मई 2024 में 2.74% थी। यह गिरावट मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों में तेज गिरावट, विशेषकर सब्जियों की कीमतों में भारी अपस्फीति के कारण दर्ज की गई।

क्यों घटी थोक महंगाई?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार:

मई में खाद्य पदार्थों में अपस्फीति 1.56% रही, जबकि अप्रैल में यह 0.86% थी।

सब्जियों में अपस्फीति मई में 21.62% दर्ज की गई, जो अप्रैल में 18.26% थी।

ईंधन और बिजली श्रेणी में भी मई में 2.27% की अपस्फीति रही।

विनिर्मित उत्पादों में मुद्रास्फीति घटकर 2.04% रह गई, जो अप्रैल में 2.62% थी।

क्या कहता है आरबीआई?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपनी मौद्रिक नीति तय करते समय मुख्य रूप से खुदरा महंगाई (CPI) को प्राथमिकता देता है।

मई में खुदरा महंगाई 2.82% पर रही, जो 6 वर्षों का सबसे निचला स्तर है।

इसके आधार पर आरबीआई ने बेंचमार्क ब्याज दरों में 0.50% की कटौती कर उन्हें 5.50% कर दिया।

आरबीआई का नया अनुमान:

वर्ष 2025-26 के लिए महंगाई दर का अनुमान 4% से घटाकर 3.7% किया गया है।

आरबीआई को उम्मीद है कि सामान्य मॉनसून के चलते खाद्य वस्तुओं की कीमतों में स्थिरता बनी रहेगी और मुद्रास्फीति नियंत्रण में रहेगी।

मई में थोक महंगाई में गिरावट एक राहत भरी खबर है, खासकर तब जब वैश्विक स्तर पर इजरायल-ईरान संघर्ष जैसी भू-राजनीतिक स्थितियां मंडरा रही हैं। सब्जियों और अन्य खाद्य पदार्थों के सस्ते होने से आम उपभोक्ता को सीधा फायदा मिलने की संभावना है। साथ ही, आरबीआई द्वारा की गई ब्याज दर में कटौती निवेश और खपत को प्रोत्साहित कर सकती है।

Share this content:

About The Author

error: Content is protected !!