इजराइल-ईरान युद्ध का भारत पर बड़ा असर: बाजार, सोना, तेल और रुपया सब हिले
1. कच्चे तेल की कीमतें दो महीने के उच्चतम स्तर पर
शुक्रवार को इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए मिसाइल हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा। ब्रेंट क्रूड 78.50 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 77.58 डॉलर पर पहुंच गया, जो क्रमश: दो महीने के उच्चतम स्तर हैं। भारत, जो अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल आयात करता है, के लिए यह महंगाई का संकेत है।
2. रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा सोना, निवेशकों का ‘सेफ हैवन’ की ओर रुख
जियोपॉलिटिकल टेंशन के चलते निवेशकों ने सोने में निवेश को प्राथमिकता दी। एमसीएक्स पर सोने की कीमत ₹1,00,403 प्रति 10 ग्राम पहुंच गई, जो अब तक का रिकॉर्ड है। सिर्फ जून में ही सोना ₹4,528 महंगा हो चुका है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कीमतें तेज़ी से बढ़ीं।
3. शेयर बाजार में हाहाकार, सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट
हमले के तुरंत बाद भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई। सेंसेक्स 1,337 अंक टूटकर 80,354.59 पर आ गया, जबकि निफ्टी में 415 अंकों की गिरावट रही और यह 24,473 पर पहुंच गया। जानकारों के अनुसार, अगर यह संघर्ष लंबा चलता है तो और गिरावट संभव है, खासकर उन सेक्टर्स में जो तेल से जुड़े हैं।
4. रुपया कमजोर, डॉलर के मुकाबले 86.08 पर आया
डॉलर के मुकाबले रुपया शुक्रवार को 56 पैसे गिरकर 86.08 पर पहुंच गया। वैश्विक तनाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और डॉलर की मजबूती से भारतीय मुद्रा पर दबाव बना। ये स्तर रुपये के लिए 2025 का सबसे कमज़ोर स्तर माना जा रहा है।
5. बॉन्ड यील्ड में उछाल, महंगाई की आशंका
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के चलते सरकारी बॉन्ड की यील्ड 5 हफ्ते के उच्चतम स्तर पर पहुंची। निवेशकों में आशंका है कि इससे देश की महंगाई और ब्याज दरों पर असर पड़ सकता है।
6. विश्लेषकों की चेतावनी: असर व्यापक होगा
जेपी मॉर्गन जैसे बड़े संस्थानों ने चेताया है कि अगर संघर्ष लंबा चला, तो तेल की कीमतें $120 तक जा सकती हैं, जिससे अमेरिकी और वैश्विक महंगाई में ज़बरदस्त उछाल आएगा। भारत जैसे आयातक देशों पर यह दबाव और बढ़ा सकता है।
एअर इंडिया हादसे के ठीक अगले दिन, इजराइल-ईरान टकराव ने भारत की अर्थव्यवस्था को झकझोर दिया है। तेल से लेकर शेयर और करेंसी मार्केट तक, हर सेक्टर में भारी उथल-पुथल है। निवेशकों और आम जनता दोनों के लिए यह चेतावनी है कि जियोपॉलिटिकल घटनाएं अब पहले से कहीं ज़्यादा तेज़ी से असर दिखा रही हैं।
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