मिडिल ईस्ट तनाव से झटका दुनिया को, लेकिन शिपिंग कंपनियों को मिला बूस्ट — SCI शेयर 14% तक उछला
जैसे ही मिडिल ईस्ट में इजरायल-ईरान तनाव की खबरें आईं, इसका सीधा असर शेयर बाजार पर दिखने लगा। शुक्रवार सुबह इजरायल द्वारा ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर हमले के बाद शिपिंग सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में ज़बरदस्त उछाल देखा गया, खासकर शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) और ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग जैसी कंपनियों में।
SCI के शेयरों में 13.61% की तेज़ी, जो 198 रुपये से बढ़कर 234.37 रुपये पर पहुंच गए। वहीं, ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग के शेयर भी 6% से ज्यादा चढ़े। इसका मुख्य कारण मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसी स्थिति के चलते तेल और प्रोडक्ट टैंकरों की बढ़ती मांग और शिपिंग रेट्स में तेज़ उछाल है।
बाल्टिक ड्राई इंडेक्स, जो ग्लोबल शिपिंग कॉस्ट का इंडिकेटर माना जाता है, एक महीने में 50% और सिर्फ जून में 34% बढ़ चुका है। इससे स्पष्ट है कि वैश्विक स्तर पर शिपिंग सेवाओं की लागत और मांग दोनों बढ़ रही हैं।
SCI को क्यों मिल रहा है निवेशकों का भरोसा?
मार्च 2025 तिमाही में म्यूचुअल फंड्स ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है (0.13% से 0.57%), जो कंपनी के भविष्य के प्रति भरोसे को दर्शाता है।
PSU कंपनी होने के नाते सरकारी सहयोग, सुरक्षित निवेश, और मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर SCI को प्रतिस्पर्धा में मज़बूत बनाता है।
ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग को भी फायदा क्यों?
कंपनी के पास 50% जहाज़ तेल और प्रोडक्ट टैंकर हैं।
जंग या तनाव के बढ़ने पर टैंकर रूट्स लंबे होंगे, जिससे रेट्स और मुनाफा दोनों बढ़ेंगे।
प्राइवेट प्लेयर होते हुए भी यह कंपनी ऐसे संकट काल में तेज़ी से मुनाफा बना सकती है।
बड़ा सवाल: ग्लोबल इकॉनमी पर असर?
अगर ईरान का 2 मिलियन बैरल रोज़ाना तेल एक्सपोर्ट बाधित होता है, तो ग्लोबल ऑयल सप्लाई का 2% प्रभावित होगा, जिससे पेट्रोल-डीज़ल, ट्रांसपोर्ट और खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ेगा। भारत जैसे आयातक देश के लिए यह स्थिति चिंता का विषय हो सकती है, लेकिन शिपिंग कंपनियों के लिए यह संकट एक कमाई का अवसर बन चुका है।
निष्कर्ष: मिडिल ईस्ट में तनाव एक तरफ जहां वैश्विक चिंता का कारण बन रहा है, वहीं शिपिंग सेक्टर के लिए यह सुनहरा मौका भी साबित हो रहा है — खासकर SCI जैसी कंपनियों के लिए जो सरकारी सहयोग के साथ बाज़ार में मज़बूती से खड़ी हैं।
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