“भारत से शुरू हो सकता है युद्ध…” – पाकिस्तान में खौफ, अमेरिका से लगाई गुहार, लेकिन क्या अब बहुत देर हो चुकी है?
दुनिया के कूटनीतिक गलियारों में अचानक हलचल तेज़ हो गई है। पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने अमेरिका से युद्ध रोकने की गुहार लगाई है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि भारत से पूर्ण युद्ध का खतरा पहले से कहीं ज़्यादा बढ़ गया है। लेकिन सवाल यह है कि पाकिस्तान अचानक इतना डरा हुआ क्यों है? इसकी जड़ें छुपी हैं पहलगाम आतंकी हमले में, जिसने पूरे घटनाक्रम को उबाल पर ला दिया।
कुछ ही दिन पहले कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने पर्यटकों से भरी एक बस को निशाना बनाकर 26 भारतीय नागरिकों की निर्मम हत्या कर दी थी। इस हमले के बाद भारत सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए “ऑपरेशन सिंदूर” की शुरुआत की। इस ऑपरेशन के तहत भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और पाकिस्तान की सरजमीं पर मौजूद कम से कम 9 आतंकी अड्डों को तबाह कर दिया। जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान ने भारत के सैन्य और नागरिक ठिकानों पर हमला करने की कोशिश की, जिसके प्रतिशोध में भारत ने पाकिस्तान के 11 एयरबेस पर सटीक और करारी जवाबी स्ट्राइक की।
युद्ध जैसे हालात बनते देख अब पाकिस्तान की ओर से अमेरिका को हस्तक्षेप के लिए बार-बार पुकारा जा रहा है। न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए एक इंटरव्यू में बिलावल भुट्टो ने ट्रंप प्रशासन और अमेरिकी सांसद मार्को रुबियो की भूमिका की सराहना करते हुए कहा, “हम युद्ध विराम के लिए राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी सरकार के आभारी हैं।”
बिलावल ने यह भी कहा कि अमेरिका ने कूटनीतिक माध्यमों से भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध टालने में मदद की, लेकिन भारत ने इस दावे को साफ खारिज कर दिया है। भारत का कहना है कि अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी, बल्कि पाकिस्तान ने खुद ही युद्ध विराम की पहल की थी। भारतीय पक्ष का मानना है कि पाकिस्तान को अंदाजा हो गया था कि भारत की सैन्य प्रतिक्रिया सीमित नहीं रहने वाली—और यही डर अब बिलावल भुट्टो की बातों में साफ झलक रहा है।
बिलावल भुट्टो ने इंटरव्यू में स्वीकार किया कि “युद्धविराम सिर्फ एक शुरुआत है, हमें अब बातचीत और कूटनीति के रास्ते शांति की ओर बढ़ना है।” लेकिन उन्होंने भारत पर यह आरोप भी मढ़ा कि उसकी “एकतरफा कार्रवाइयों” ने पूरे क्षेत्र को असुरक्षित बना दिया है। उनका कहना था कि आज दक्षिण एशिया पहले से कहीं ज्यादा अस्थिर हो गया है।
यह पूरी स्थिति अब एक बार फिर उस पुराने सवाल को जगा रही है—क्या भारत-पाकिस्तान के बीच एक और बड़ा युद्ध होने जा रहा है? और अगर अमेरिका इस बार फिर कूदता है, तो क्या उसका प्रभाव सिर्फ एक मध्यस्थ तक सीमित रहेगा, या इस बार उसकी रणनीति कहीं और से संचालित होगी—जैसे कि ईरान संकट में देखा जा रहा है?
हालात जैसे बन रहे हैं, उनमें पाकिस्तान की हड़बड़ाहट और भारत की सैन्य तैयारी आने वाले समय की गंभीर चेतावनी हो सकती है। और इस बार, शायद कोई भी कूटनीतिक टेलीफोन कॉल जंग को नहीं रोक सकेगा।
Share this content:
