April 30, 2026

पंजाब-हरियाणा जल विवाद: हाईकोर्ट से पंजाब सरकार को झटका, पानी छोड़ने के आदेश पर पुनर्विचार की याचिका खारिज

चंडीगढ़: पंजाब और हरियाणा के बीच भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) से जुड़े जल विवाद पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार की याचिका खारिज कर दी है। इस याचिका में छह मई 2025 को दिए गए उस आदेश को वापस लेने या संशोधित करने की मांग की गई थी, जिसमें पंजाब को हरियाणा को 4,500 क्यूसेक अतिरिक्त पानी देने का निर्देश दिया गया था।

 

क्या है विवाद का मूल?

2 मई 2025 को केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि हरियाणा को तत्काल जल संकट के मद्देनज़र अतिरिक्त पानी की आपूर्ति की जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने इस आधार पर 6 मई को पंजाब को हरियाणा को अतिरिक्त पानी देने का आदेश दिया था।

 

पंजाब सरकार का आरोप था कि केंद्र सरकार, हरियाणा और BBMB ने महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया, जिनकी वजह से अदालत ने यह आदेश दिया। इसके खिलाफ 26 मई को पंजाब ने हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी।

 

हाईकोर्ट ने पंजाब की दलीलों को क्यों खारिज किया?

मुख्य न्यायाधीश शील नागू और जस्टिस सुमीत गोयल की खंडपीठ ने शनिवार को स्पष्ट किया कि—

यह आदेश आपातकालीन स्थिति में लाखों लोगों को पानी पहुंचाने के लिए दिया गया था।

अदालत ने कहा कि अगर पंजाब को आपत्ति है तो वह नियम 7 के तहत केंद्र को औपचारिक शिकायत दे सकता है।

 

पंजाब का यह तर्क भी खारिज हुआ कि वेस्टर्न यमुना कैनाल की मरम्मत के बाद हरियाणा को पानी की ज़रूरत नहीं रही। कोर्ट ने कहा कि आदेश उस वक्त की तात्कालिक स्थिति पर आधारित था और किसी भी पक्ष को पूर्वाग्रह नहीं पहुंचा है।

 

अब क्या संकट है पंजाब के सामने?

हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन न करने पर पंजाब के मुख्य सचिव और डीजीपी पर अवमानना की तलवार लटक रही है। कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट किया था कि यदि आदेश का पालन नहीं होता तो यह न्यायालय की अवमानना मानी जाएगी!

 

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और राज्य सरकारों की स्थिति

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का कहना है कि पंजाब के पास हरियाणा को देने के लिए “एक बूंद अतिरिक्त पानी भी नहीं है।” वहीं, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि पंजाब पुराने समझौतों का उल्लंघन कर रहा है, जिससे हरियाणा में जल संकट और बढ़ेगा। पंजाब ने नंगल बांध पर पुलिस तैनात कर दी थी, जिससे BBMB और हरियाणा ने इसे अवैध हस्तक्षेप बताया।

 

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में क्यों है यह अहम?

 

2004 में सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब द्वारा जल समझौतों को रद्द करने को असंवैधानिक ठहराया था।

 

कोर्ट ने SYL नहर के निर्माण को पूरा करने का निर्देश दिया था, लेकिन पंजाब आज तक इस पर अमल नहीं कर सका।

 

2025 में हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि पंजाब BBMB के संचालन में हस्तक्षेप नहीं करेगा और हरियाणा को पानी देगा।

इस निर्णय से स्पष्ट है कि अदालत जल संकट जैसे मसलों को मानवीय दृष्टिकोण से देख रही है, न कि केवल संवैधानिक व्याख्या के आधार पर। पंजाब सरकार को अब या तो सुप्रीम कोर्ट का रुख करना होगा या केंद्र सरकार को औपचारिक संदर्भ देकर नया समाधान तलाशना होगा।

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