May 3, 2026

जहर की खेती: अमेरिका में चीन पर ‘एग्रो-टेररिज्म’ का सनसनीखेज आरोप

क्या हो अगर गेहूं, चावल और मक्का खेतों में ही सड़ने लगें? अगर भोजन का स्रोत ही जैविक ज़हर में बदल जाए? अमेरिका में ऐसी ही एक खौफनाक साजिश का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें दो चीनी नागरिकों पर जैविक आतंकवाद यानी ‘एग्रो-टेररिज्म’ फैलाने का गंभीर आरोप लगा है।

 

यह साजिश सिर्फ एक वैज्ञानिक प्रयोग नहीं, बल्कि अमेरिका की खाद्य सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा पर सुनियोजित हमला मानी जा रही है। एफबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, मिशिगन यूनिवर्सिटी की एक लैब में एक ऐसा फंगस पहुंचाया गया, जो अमेरिकी खेतों की रीढ़ तोड़ सकता था।

 

फंगस या जैविक हथियार?

 

एफबीआई ने बताया कि मिशिगन यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च लैब में चोरी-छिपे लाया गया यह फंगस था Fusarium graminearum, जो गेहूं, मक्का, जौ और चावल जैसी प्रमुख फसलों को पूरी तरह नष्ट करने की क्षमता रखता है।

 

इस फंगस को अमेरिका में लाने वाले दो चीनी नागरिक — युनकिंग जियान (33) और जुनयोंग लियू (34) — अब एफबीआई की हिरासत में हैं। पूछताछ के दौरान पहले तो जुनयोंग लियू ने झूठ बोला, लेकिन बाद में उसने कबूल किया कि वह इस जैविक एजेंट को डेट्रॉयट एयरपोर्ट के रास्ते अमेरिका लाया और उसे यूनिवर्सिटी की लैब में रखवाया गया।

 

“यह हमला हमारी खाद्य सुरक्षा पर है”

 

एफबीआई के निदेशक काश पटेल ने कहा कि, “यह सिर्फ फंगस नहीं, बल्कि जैविक हथियार है। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी हमारी खाद्य प्रणाली और संस्थानों को अंदर से कमजोर करने की कोशिश कर रही है।”

 

पटेल ने यह भी कहा कि इस घटना को मामूली नहीं समझा जा सकता, क्योंकि यह अमेरिका की फूड चेन, किसानों और आम नागरिकों की सेहत पर सीधा हमला है। इसे अमेरिका की ‘जड़ों पर वार’ के रूप में देखा जा रहा है।

 

यूनिवर्सिटी की आड़ में जैविक जंग

 

डेट्रॉयट फील्ड ऑफिस के स्पेशल एजेंट चेवोरिया गिब्सन के मुताबिक, यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च लैब का गलत इस्तेमाल कर जैविक एजेंट को देश में लाया गया। यह राष्ट्रीय सुरक्षा और पब्लिक सेफ्टी के खिलाफ बड़ा अपराध है।

 

अब युनकिंग जियान को डेट्रॉयट की एक संघीय अदालत में पेश किया जाना है। अगर अदालत में दोनों दोषी साबित होते हैं, तो यह केस अमेरिका के इतिहास में एग्रो-टेररिज़्म के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाई बन सकता है।

 

क्या यह सिर्फ शुरुआत है?

 

इस घटना ने अमेरिका की खुफिया एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। सवाल ये उठ रहा है कि क्या यह केवल एक घटना थी या एग्रो-टेररिज्म की एक व्यापक रणनीति की शुरुआत?

 

इस खुलासे ने साफ कर दिया है कि भविष्य के युद्ध सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि खाद्य आपूर्ति और जैविक एजेंटों से भी लड़े जा सकते हैं — और इसमें तकनीक और साइंस को घातक रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

जवाब अभी अदालत से आएगा, लेकिन अमेरिका ने यह संकेत ज़रूर दे दिया है — जैविक जंग के खिलाफ अब वो पीछे नहीं हटेगा।

 

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