April 22, 2026

बकवास हैं अमेरिका के आरोप, नुकसान पहुंचाने की मंशा से लगाए गए : अडानी ग्रुप का जवाब

भारत के सबसे बड़े निजी पोर्ट ऑपरेटर अडानी ग्रुप एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय विवादों की चपेट में है। इस बार आरोप अमेरिका से आए हैं, जिसमें अडानी ग्रुप पर ईरान पर लगे प्रतिबंधों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। अमेरिका की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रुप की कंपनियों के खिलाफ यह जांच शुरू की गई है कि क्या उन्होंने ईरानी एलपीजी का भारत में आयात किया। लेकिन अडानी ग्रुप ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें बेबुनियाद और दुर्भावनापूर्ण बताया है।

अडानी ग्रुप का साफ कहना है कि उसने अपने किसी बंदरगाह पर ईरान या ईरानी स्वामित्व वाले किसी भी जहाज या कार्गो को न तो संभाला है और न ही उसके संचालन में कोई भूमिका निभाई है। समूह की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि उसने किसी भी प्रकार से अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों का उल्लंघन नहीं किया है। अडानी पोर्ट्स का यह भी कहना है कि उसने जानबूझकर या अनजाने में किसी भी प्रतिबंधित लेनदेन को अंजाम नहीं दिया।

यह विवाद तब सामने आया जब अमेरिका की प्रमुख मीडिया संस्था वॉल स्ट्रीट जर्नल ने एक रिपोर्ट में दावा किया कि अमेरिकी जांच एजेंसियां अडानी ग्रुप के खिलाफ इस मामले में पड़ताल कर रही हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया कि अडानी ग्रुप की कंपनियां गुजरात के मुंद्रा पोर्ट के जरिए भारत में ईरान से एलपीजी का आयात कर रही हैं। रिपोर्ट के सार्वजनिक होते ही अडानी ग्रुप ने स्टॉक एक्सचेंज को जानकारी दी कि यह आरोप “बेसलैस और मालीशस” यानी बिना किसी आधार और दुर्भावनापूर्ण हैं।

अडानी ग्रुप ने जोर देकर कहा कि उनकी कंपनी किसी भी ईरानी जहाज, कार्गो या ईरानी झंडे के अंतर्गत संचालित जहाजों को किसी भी सुविधा का लाभ नहीं देती है। समूह की स्पष्ट नीति है कि वह ऐसे किसी भी जहाज या खेप को न संभाले, जिसका संबंध ईरान या ईरानी कंपनियों से हो। कंपनी ने यह भी कहा कि उसके सभी पोर्ट पर इस नीति का सख्ती से पालन होता है।

इस पूरी रिपोर्ट और आरोपों के बीच एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब अडानी ग्रुप की एक प्रमुख कंपनी – अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड – ने 4,300 करोड़ रुपये की फंडिंग जुटाने का फैसला लिया है। कंपनी ने क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) के जरिए एक या अधिक किश्तों में यह पूंजी जुटाने की योजना बनाई है। यह रकम कंपनी की विकास योजनाओं और विस्तार परियोजनाओं के लिए जुटाई जानी है।

पिछले कुछ वर्षों में अडानी ग्रुप पहले ही हिंडनबर्ग रिपोर्ट, स्टॉक हेरफेर और अन्य आरोपों की वजह से वैश्विक स्तर पर सुर्खियों में रहा है। अब यह नया मामला अमेरिकी एजेंसियों की जांच के चलते ग्रुप की प्रतिष्ठा और निवेश योजनाओं को फिर से सवालों के घेरे में खड़ा कर रहा है। हालांकि, ग्रुप की ओर से तुरंत और स्पष्ट प्रतिक्रिया देकर अपने पक्ष को मजबूती से रखने की कोशिश की गई है।

इस पूरे घटनाक्रम पर नज़र डालें तो यह साफ है कि अडानी ग्रुप फिलहाल अंतरराष्ट्रीय निगरानी में है, और उसे अपने हर कदम को सावधानीपूर्वक उठाना होगा ताकि उसकी कारोबारी विश्वसनीयता और निवेशकों का भरोसा बना रहे। अमेरिका के इन आरोपों का असर शेयर बाजार और निवेशक धारणा पर कितना पड़ेगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

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