जौनपुर में अस्पताल की इमरजेंसी वार्ड बनी जंग का मैदान: अचानक पहुंचे किन्नर और युवकों ने मचाया तांडव, डॉक्टरों पर टूट पड़ा कहर
उत्तर प्रदेश के जौनपुर से शुक्रवार देर रात एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने न सिर्फ चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए, बल्कि अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। मामला शहर के प्रतिष्ठित उमानाथ सिंह राजकीय चिकित्सालय से जुड़ा है, जहां इमरजेंसी कक्ष में कार्यरत डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों पर अचानक किन्नरों और उनके साथ आए युवकों ने हमला बोल दिया।
रात 10 बजे अस्पताल की इमरजेंसी में मचा कोहराम
शुक्रवार की रात लगभग 10 बजे जिला अस्पताल की इमरजेंसी वार्ड में कुछ युवक पुलिस सिपाहियों के साथ मेडिकल चेकअप के लिए पहुंचे थे। इन युवकों की किसी झगड़े या मारपीट की घटना में संलिप्तता थी और पुलिस उन्हें मेडिकल जांच के लिए अस्पताल लाई थी। यहां पर डॉक्टर किसी अन्य मरीज का इलाज कर रहे थे, इसी बीच युवकों ने मेडिकल में जल्दबाज़ी करने का दबाव बनाया।
मेडिकल रिपोर्ट में देरी बनी विवाद की वजह
डॉक्टरों ने जब नियमानुसार इलाज पूरा होने के बाद मेडिकल रिपोर्ट देने की बात कही, तो युवकों ने बहस शुरू कर दी। थोड़ी ही देर में चार किन्नर भी अस्पताल पहुंच गए और उन्होंने डॉक्टरों से न सिर्फ बदसलूकी की बल्कि खुलेआम हंगामा शुरू कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, किन्नरों ने कपड़े उतार कर अस्पताल परिसर में नग्न प्रदर्शन किया और डॉक्टरों व अन्य स्टाफ से मारपीट करने लगे।
डॉक्टरों पर हमला, मरीजों में दहशत
घटना इतनी तेजी से घटी कि डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के पास खुद को बचाने का समय तक नहीं था। कुछ कर्मचारियों ने इमरजेंसी से भागकर खुद को दूसरे कमरों में बंद कर लिया। वहीं, मरीजों और उनके परिजनों में भी दहशत फैल गई। कई लोग अपने बीमार परिजनों को लेकर भागते नजर आए। पूरा अस्पताल परिसर युद्ध का मैदान बन गया।
प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग
घटना की सूचना मिलने पर अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर केके राय ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और लिखित शिकायत दर्ज कराई। डॉक्टर राय ने बताया कि यह एक सुनियोजित हमला था जिसमें अस्पताल की गरिमा और स्वास्थ्य सेवाओं को तार-तार किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल कर्मियों को निशाना बनाकर हिंसा की गई, जो बेहद निंदनीय है।
पुलिस जांच में जुटी, सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे
फिलहाल पुलिस ने अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है और दोषियों की पहचान के लिए जांच तेज कर दी गई है। चिकित्सकों की मांग है कि इस घटना में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।
जौनपुर का यह मामला केवल एक अस्पताल में हुए हंगामे का नहीं है, बल्कि यह प्रदेश भर की स्वास्थ्य सेवाओं की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा करता है। क्या डॉक्टर अब अपनी ड्यूटी के दौरान भी सुरक्षित नहीं हैं? प्रशासन को इस प्रश्न का जवाब देना ही होगा।
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