April 29, 2026

दारुल उलूम देवबंद ने जारी किया गंभीर संदेश: फिलिस्तीन में हो रहा नरसंहार, मुसलमानों से अपील- उठाएं आवाज़ और दुआ करें

दारुल उलूम देवबंद ने गाजा पट्टी में इस वक्त चल रही हिंसा और तबाही की कड़ी निंदा करते हुए विश्व समुदाय की मौन सहमति को शर्मनाक बताया है। इस्लामिक शिक्षा के सबसे बड़े केंद्र दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने एक पत्र जारी किया है, जिसमें उन्होंने फिलिस्तीन और खासकर गाजा में हो रहे दर्दनाक हालात को नरसंहार करार दिया है। उन्होंने पूरे मुस्लिम समुदाय से अपील की है कि वे फिलिस्तीन के मासूम और पीड़ित लोगों के लिए दुआ करें और इस अन्याय और क्रूरता के खिलाफ एकजुट होकर अपनी आवाज उठाएं।

मौलाना नोमानी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ और दुनिया के तमाम मानवाधिकार संगठन फिलहाल मूकदर्शक बने हुए हैं, जबकि गाजा में हो रहे हालात किसी युद्ध नहीं, बल्कि 21वीं सदी के सबसे बड़े नरसंहार की तरह हैं। उन्होंने कहा कि इस्लामी धरती फिलिस्तीन आज इतिहास के सबसे भयानक दौर से गुजर रही है, जहां बेकसूर महिलाएं, बच्चे और आम नागरिक लगातार बमबारी और हिंसा का शिकार हो रहे हैं। शहर तबाह हो चुके हैं, और एक पूरी संस्कृति, एक पूरा समाज तबाह हो रहा है। उनका कहना है कि यह सब दुनिया की आंखों के सामने हो रहा है, लेकिन इस हिंसा को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।

दारुल उलूम के पत्र में यह भी लिखा गया है कि इस नरसंहार का मकसद फिलिस्तीन को विश्व के नक्शे से मिटा देना है। मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम ने कहा कि फिलिस्तीन की सरजमीं अब मरघट की तरह हो चुकी है और ऐसे हालात में भारत समेत दुनिया के सभी मुसलमानों की नैतिक, धार्मिक और मानवीय जिम्मेदारी बनती है कि वे इस दर्द को समझें और पीड़ितों के लिए दुआ के साथ-साथ इस अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाएं।

यह युद्ध अक्टूबर 2023 में तब शुरू हुआ जब हमास ने इजराइल पर हमला किया और इजराइली बंधकों को बंधक बनाया। इसके बाद इजराइल ने जवाबी कार्रवाई करते हुए गाजा पट्टी में हमास के ठिकानों पर भारी हवाई और जमीनी हमले किए, जिससे गाजा पट्टी खंडहर में तब्दील हो गई। इन हमलों में बड़ी संख्या में निर्दोष आम लोग, महिलाएं, बच्चे, चिकित्सक और पत्रकार मारे गए हैं। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अब तक 53,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 18,000 बच्चे और 12,400 से अधिक महिलाएं शामिल हैं। यह आंकड़े वास्तविक स्थिति की केवल आंशिक झलक हैं और नुकसान कहीं अधिक गंभीर है।

दारुल उलूम देवबंद की यह अपील सिर्फ धार्मिक आह्वान नहीं, बल्कि मानवता के लिए एक पुकार है। मौलाना नोमानी ने स्पष्ट किया है कि इस दर्दनाक स्थिति में मुसलमानों को एकजुट होकर फिलिस्तीन के लोगों के लिए दुआ करनी होगी, उनके दर्द को महसूस करना होगा और दुनिया के सामने इस अत्याचार को रोकने के लिए अपनी आवाज बुलंद करनी होगी। साथ ही उन्होंने सभी से कहा है कि इंसानियत के नाते भी यह हमारा कर्तव्य है कि हम इन निर्दोष लोगों की मदद के लिए आगे आएं और वैश्विक स्तर पर इस अन्याय को खत्म कराने की मांग करें।

दारुल उलूम देवबंद की यह अपील फिलिस्तीन के बेकसूर लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण है, जो पूरी दुनिया से इंसानियत और न्याय की गुहार लगाती है।

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