April 30, 2026

छत्तीसगढ़ के जंगलों में हुई ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: बसवराज समेत 27 इनामी नक्सली ढेर, एक-एक नाम और इनाम की पूरी लिस्ट सामने आई

21 मई 2025 की सुबह छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ जंगलों में जो कुछ हुआ, वह नक्सल इतिहास में सबसे बड़ी और निर्णायक मुठभेड़ के रूप में दर्ज हो गया। कई दशकों से जंगलों में खून और बंदूक का खेल खेलने वाले जिन चेहरों की तलाश देशभर की एजेंसियों को थी, वे एक ही दिन में सन्नाटे में समा गए।

इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी कामयाबी थी – भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) का महासचिव नंबाला केशव राव उर्फ बसवराज। बसवराज कोई साधारण नक्सली नहीं था – वह पूरे देश में वांछित था और उस पर कुल 10 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक ऐसा लक्ष्य था, जिसे मार गिराना वर्षों से एक सपना बना हुआ था।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। बसवराज के साथ-साथ कुल 27 बड़े नक्सली कमांडर इस एनकाउंटर में मारे गए। ये सभी किसी न किसी राज्य में वांछित थे और इनके नाम पर लाखों-करोड़ों का इनाम घोषित था। मुठभेड़ के बाद जब सुरक्षाबलों ने शवों की पहचान शुरू की, तो जो नाम सामने आए, उन्होंने पूरे माओवादी नेटवर्क की रीढ़ को तोड़ दिया।

इस ऑपरेशन को माओवादी आंदोलन के इतिहास में सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। मारे गए नक्सलियों की सूची बेहद चौंकाने वाली है, जिनमें से कई शीर्ष कमांडर थे, जिनका लंबे समय से पीछा किया जा रहा था।

1. नंबाला केशव राव उर्फ बसवराज – उम्र: 67 वर्ष, मूल स्थान: तेलंगाना, पद: महासचिव, CPI (माओवादी), इनाम: 10 करोड़ रुपये।
2. रमन्ना उर्फ मलंगिरी दादा – उम्र: 55 वर्ष, मूल स्थान: ओडिशा, इनाम: 1 करोड़ रुपये।
3. वीरा उर्फ विजय यदुवंशी – उम्र: 48 वर्ष, मूल स्थान: महाराष्ट्र, इनाम: 60 लाख रुपये।
4. सुमित्रा उर्फ कोमल – उम्र: 42 वर्ष, मूल स्थान: छत्तीसगढ़, इनाम: 25 लाख रुपये।
5. राजू उर्फ महेश कोवासी – उम्र: 38 वर्ष, मूल स्थान: बस्तर, इनाम: 20 लाख रुपये।
6. सुशीला उर्फ पद्मा – उम्र: 40 वर्ष, मूल स्थान: झारखंड, इनाम: 30 लाख रुपये।
7. भास्कर उर्फ चिन्ना राजन – उम्र: 51 वर्ष, मूल स्थान: आंध्र प्रदेश, इनाम: 35 लाख रुपये।
8. जावेद उर्फ अजीत डोंगरी – उम्र: 37 वर्ष, मूल स्थान: महाराष्ट्र, इनाम: 15 लाख रुपये।

इनके अलावा 19 और नक्सलियों की पहचान हुई है, जिनमें से अधिकतर बस्तर, बीजापुर, सुकमा, झारखंड, तेलंगाना और महाराष्ट्र के निवासी थे। इन सभी पर 5 लाख से लेकर 50 लाख रुपये तक के इनाम घोषित थे।

मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों ने भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद, वायरलेस सेट, नक्सली साहित्य और दस्तावेज बरामद किए हैं। ऑपरेशन की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मारे गए नक्सलियों में अधिकांश ने कई सालों से जंगलों को अपनी पनाहगाह बना रखा था और बार-बार सुरक्षा बलों को चकमा दे रहे थे।

इस ऑपरेशन के बाद नक्सलियों का पूरा नेटवर्क मनौवैज्ञानिक रूप से कमजोर हुआ है। वरिष्ठ अधिकारी मानते हैं कि बसवराज जैसे वरिष्ठ नेता की मौत के बाद संगठन नेतृत्व संकट में है, और इसका असर पूरे देश में नक्सली गतिविधियों पर पड़ेगा।

यह ऑपरेशन केवल एक एनकाउंटर नहीं, बल्कि एक सामरिक और रणनीतिक विजय है। वर्षों से जो इलाके नक्सलियों के कब्जे में थे, अब वहां सुरक्षा बलों की मजबूत पकड़ बन रही है और सरकार द्वारा चलाए जा रहे विकास कार्यों को नई गति मिल सकती है।

निष्कर्ष के तौर पर, 21 मई 2025 की यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए नक्सलवाद के अंत की ओर एक निर्णायक कदम मानी जा रही है। अबूझमाड़ की इस मुठभेड़ ने यह साफ कर दिया है कि अब बंदूक नहीं, विकास की बात होगी।

Share this content:

About The Author

error: Content is protected !!