April 30, 2026

भारत-अमेरिका-जापान के बीच मजबूत होते व्यापारिक रिश्ते, अंतरिम समझौते की तैयारी

भारत और अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की घोषणा जल्द हो सकती है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस बात के संकेत देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार को लेकर सार्थक और सकारात्मक चर्चा हुई है। वह पिछले चार दिनों से अमेरिका दौरे पर हैं और दोनों देशों के मुख्य वार्ताकारों के बीच गहन बातचीत जारी है।

सूत्रों के अनुसार, यह समझौता द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के पहले चरण के पूर्ण होने से पहले लाया जा रहा है, ताकि अमेरिका की टैरिफ नीति के कारण आपसी व्यापार में उत्पन्न अवरोधों को समय रहते दूर किया जा सके। गौरतलब है कि अमेरिका ने अप्रैल 2025 में भारत पर 26% पारस्परिक शुल्क लागू किया था, जिसे 90 दिनों के लिए स्थगित किया गया है। यह अवधि जुलाई के दूसरे सप्ताह में समाप्त हो रही है, इसलिए दोनों देश शुल्क व्यवस्था को लेकर एक स्थायी समाधान चाहते हैं।

भारत ने अमेरिका से मांग की है कि वह श्रम-प्रधान सेक्टरों जैसे वस्त्र, चमड़ा, रत्न-जवाहरात, कृषि उत्पादों पर शून्य या न्यूनतम शुल्क लागू करे, जिससे भारतीय निर्यात को बढ़ावा मिले और देश में मैन्युफैक्चरिंग तथा रोजगार के अवसर बढ़ें। दूसरी ओर अमेरिका इलेक्ट्रिक वाहन, वाइन, एथनॉल, औद्योगिक वस्तुएं और कुछ खाद्य पदार्थों पर शुल्क छूट चाहता है। इसके अतिरिक्त वह भारत के गुणवत्ता नियंत्रण नियमों में भी नरमी की मांग कर रहा है।

भारत ने पिछले दो वर्षों में कई उत्पादों पर BIS (भारतीय मानक ब्यूरो) के तहत गुणवत्ता नियंत्रण के सख्त नियम लागू किए हैं, जिसके अंतर्गत आयातित वस्तुओं पर तभी अनुमति मिलती है जब उनकी फैक्ट्री में भारतीय निरीक्षकों द्वारा जांच कर प्रमाणन जारी किया गया हो। अमेरिका चाहता है कि इन नियमों में ढील दी जाए। भारत कुछ फलों और मेवों पर शुल्क में छूट देने पर विचार कर सकता है, लेकिन डेयरी उत्पादों को लेकर किसी भी छूट की संभावना बहुत कम है।

इस संभावित समझौते पर चीन की पैनी नजर है। चीन आशंका जता रहा है कि अगर कोई देश अमेरिका के साथ ऐसा समझौता करता है जिससे उसे नुकसान होता है, तो वह उस देश के खिलाफ सख्त कदम उठा सकता है। दूसरी ओर, पाकिस्तान के लिए यह समझौता रणनीतिक और आर्थिक दोनों ही दृष्टि से झटका साबित हो सकता है, क्योंकि भारत-अमेरिका संबंधों की प्रगाढ़ता क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर सकती है।

अमेरिका-चीन ट्रेड वार और भारत-जापान की भूमिका

अमेरिका और चीन के बीच चल रही ट्रेड वार वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाल रही है। जेफरीज की रिपोर्ट के अनुसार इस संघर्ष से भारत और जापान को अमेरिका के साथ बेहतर शर्तों पर व्यापार समझौते करने का अवसर मिल सकता है। हालांकि ये दोनों देश चीन के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को बिगाड़ना नहीं चाहेंगे। अमेरिका रणनीति बना रहा है कि वह अन्य देशों के साथ मजबूत ट्रेड रिलेशन स्थापित कर चीन को अलग-थलग करे, लेकिन इस दिशा में सफलता मिलना आसान नहीं है क्योंकि वैश्विक व्यापार में चीन की हिस्सेदारी अब अमेरिका से कहीं अधिक है।

ट्रेड वार की शुरुआत और चीन की चेतावनी

2 अप्रैल 2025 को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने “रेसिप्रोकल टैरिफ” की घोषणा की, जिसके तहत अमेरिका में किसी भी देश को सामान बेचने पर अतिरिक्त शुल्क देना होगा। हालांकि जल्द ही घोषणा की गई कि चीन को छोड़कर अन्य देशों पर यह टैरिफ 90 दिनों के लिए स्थगित रहेगा। इसी फैसले के बाद अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वार शुरू हुई। चीन ने चेतावनी दी है कि अगर कोई देश अमेरिका के साथ ऐसा समझौता करता है जिससे चीन के व्यापारिक हित प्रभावित होते हैं, तो वह कड़ी प्रतिक्रिया देगा।

इस पूरे घटनाक्रम से वैश्विक अर्थव्यवस्था में अस्थिरता देखी गई है—शेयर बाजार में गिरावट आई, और सोने की कीमतें तेजी से बढ़ीं। ऐसे में भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौता सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक दृष्टिकोण से भी बेहद अहम बन गया है।

Share this content:

About The Author

error: Content is protected !!