राजस्थान बॉर्डर पर हाई अलर्ट के बीच पहुँचे आर्मी चीफ और CDS, ऑपरेशन सिंदूर की तैयारियों की समीक्षा – लोंगेवाला की धरती पर फिर गूंजे ‘भारत माता की जय’ के नारे
राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में इन दिनों गहमागहमी और सैन्य गतिविधियाँ तेज़ हो गई हैं। पाकिस्तान की ओर से हालिया तनाव और ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद, पहली बार भारतीय सेना के शीर्ष अधिकारी—थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान—सीमा के अग्रिम मोर्चों का दौरा करने पहुँचे। इस दौरे को भारत की सैन्य तैयारी और मनोबल के प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है।
लोंगेवाला की वीरभूमि पर पहुँचे सेना प्रमुख
जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने राजस्थान के जैसलमेर जिले में स्थित ऐतिहासिक लोंगेवाला पोस्ट का दौरा किया। यह वही स्थल है जहाँ 1971 के भारत-पाक युद्ध में भारतीय सेना के महज 120 जवानों ने पाकिस्तानी सेना के 3,000 सैनिकों और 46 टैंकों को मुंहतोड़ जवाब दिया था। यह लड़ाई न सिर्फ भारत की सैन्य ताकत का प्रतीक बनी, बल्कि इसे भारतीय सैन्य इतिहास का स्वर्णिम अध्याय भी कहा जाता है। आर्मी चीफ ने जवानों से मुलाकात की, उनके साथ ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए और ऑपरेशन सिंदूर के तहत हाल में हुई सैन्य कार्रवाई की समीक्षा की।
उन्होंने उन जवानों से भी मुलाकात की जिन्होंने हाल में पाकिस्तान की ओर से की गई साजिशों को नाकाम किया। दौरे के दौरान सेना प्रमुख ने तैयारियों का जायज़ा लिया और जवानों को सतर्क और तैयार रहने का संदेश दिया।
CDS जनरल अनिल चौहान का रणनीतिक दौरा
थलसेना प्रमुख के दौरे के तुरंत बाद, CDS जनरल अनिल चौहान ने भी पश्चिमी सीमा के कुछ अहम सैन्य अड्डों का दौरा किया। उन्होंने सूरतगढ़ स्थित सैन्य स्टेशन और गुजरात में स्थित नलिया वायुसेना स्टेशन का दौरा कर जवानों का मनोबल बढ़ाया। ये दोनों सैन्य ठिकाने रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
CDS ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सैनिकों द्वारा दिखाए गए साहस और रणनीतिक सूझबूझ की सराहना की। उन्होंने जवानों से बातचीत कर उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने को कहा और भरोसा जताया कि भारतीय सेना हर खतरे का मुँहतोड़ जवाब देने में पूरी तरह सक्षम है।
रणनीतिक संकेत और मनोबल का संदेश
इन दोनों शीर्ष अधिकारियों का यह संयुक्त दौरा कई स्तरों पर संदेश देता है—एक ओर यह पाकिस्तान को चेतावनी है कि भारत सीमा पर किसी भी साजिश को लेकर पूरी तरह सतर्क है, वहीं दूसरी ओर यह देशवासियों को यह भरोसा भी दिलाता है कि सीमाओं की रक्षा के लिए भारतीय सेना पूरी तरह मुस्तैद है।
लोंगेवाला की धरती पर फिर से जब ‘भारत माता की जय’ के नारे गूंजे, तो यह न केवल इतिहास की याद दिलाता है, बल्कि यह भी बताता है कि आज भी भारतीय जवान उसी जज़्बे, हिम्मत और तैयारी के साथ सीमा की रक्षा कर रहे हैं।
Share this content:
