जब ग़ज़ल के सम्राट से बंदूक की नोक पर गवाया गया गाना… और जब प्यार ने तोड़ दी धर्म की दीवार”
सालों तक अपनी मखमली आवाज़ से करोड़ों दिलों में राज करने वाले ग़ज़ल सम्राट पंकज उधास की ज़िंदगी जितनी सुरीली थी, उतनी ही दिलचस्प और उतार-चढ़ाव से भरी हुई भी। उनका हर गाना, हर ग़ज़ल एक एहसास बनकर सुनने वालों के ज़हन में उतर जाता था। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस सादगी भरे कलाकार की ज़िंदगी में एक ऐसा लम्हा भी आया था, जब उसे बंदूक की नोक पर गाना पड़ा। और एक समय ऐसा भी जब अपनी मोहब्बत के लिए उसे समाज के सवालों से जूझना पड़ा।
17 मई को पंकज उधास की 73वीं बर्थ एनिवर्सरी है। इस मौके पर जब हम उनके जीवन के पन्ने पलटते हैं, तो कई अनकहे किस्से सामने आते हैं। ‘ना कजरे की धार’ और ‘चिट्ठी आई है’ जैसे कालजयी गीतों को आवाज़ देने वाले पंकज उधास ने संगीत की दुनिया में जो मुकाम हासिल किया, वह विरले ही किसी को नसीब होता है। लेकिन इस सफलता के पीछे कई संघर्ष और दर्द भरे किस्से छिपे हुए हैं।
पंकज उधास की लव लाइफ भी कुछ कम चर्चित नहीं रही। उन्होंने एक मुस्लिम लड़की से शादी की थी, जो उस दौर में काफी बड़ा कदम माना जाता था। उन्होंने अपने दिल की सुनी, लेकिन इस रिश्ते को समाज ने इतनी आसानी से स्वीकार नहीं किया। उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने प्यार को नहीं छोड़ा।
एक इंटरव्यू में पंकज उधास ने चौंकाने वाला किस्सा साझा किया था। एक बार जब उन्होंने एक खास ग़ज़ल गाने से इनकार किया, तो एक शख्स ने उन पर बंदूक तान दी। पंकज उधास ने बताया कि उस फैन की दीवानगी इतनी बढ़ गई थी कि वो किसी भी हाल में अपनी पसंदीदा ग़ज़ल सुनना चाहता था। उस तनावपूर्ण माहौल में भी पंकज ने हिम्मत नहीं हारी और स्थिति को संभाला।
उनकी ज़िंदगी के ये तमाम किस्से हमें बताते हैं कि एक कलाकार का जीवन सिर्फ मंच पर गाए सुरों तक सीमित नहीं होता। उसके पीछे संघर्ष, समाज से लड़ाई और कई बार जान का जोखिम भी होता है। पंकज उधास सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि भावनाओं की एक धारा थे—जो आज भी उनकी ग़ज़लों के ज़रिए लोगों के दिलों में ज़िंदा है।
उनकी बर्थ एनिवर्सरी पर उन्हें याद करना, न केवल उनकी आवाज़ को श्रद्धांजलि देना है, बल्कि उनके संघर्षों और साहस को भी सलाम करना है।
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