सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: बंगाल सरकार को तीन महीने में बढ़ाना होगा सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता
पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों के लिए राहत की खबर आई है। लंबे समय से चली आ रही मांगों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (डियरनेस अलाउंस, DA) कम से कम 25 प्रतिशत तक बढ़ाए और तीन महीने के अंदर इसका भुगतान सुनिश्चित करे। यह आदेश राज्य सरकार की वर्तमान नीति और केंद्र सरकार के डीए के बीच बने भारी अंतर को खत्म करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
वर्तमान में पश्चिम बंगाल सरकार अपने कर्मचारियों को 18 प्रतिशत महंगाई भत्ता देती है, जबकि केंद्र सरकार यह राशि 55 प्रतिशत तक देती है। इस वजह से केंद्र और राज्य के कर्मचारियों के बीच करीब 37 प्रतिशत का बड़ा अंतर बन गया है, जिसे लेकर कर्मचारी लंबे समय से समान डीए देने की मांग करते आ रहे थे। इस विषय में पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने मई 2022 में आदेश दिया था कि राज्य सरकार को केंद्र के बराबर डीए देना होगा। हालांकि, राज्य सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस संजय करोल और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने इस मामले में हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर 25 प्रतिशत डीए बढ़ाकर कर्मचारियों को भुगतान करना होगा। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई अगस्त 2025 में निर्धारित की है।
इस फैसले का असर लगभग 10 लाख सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर पड़ेगा। महंगाई भत्ता यानी डीए मूल वेतन के एक निश्चित प्रतिशत के रूप में कर्मचारियों को महंगाई के प्रभाव से बचाने के लिए दिया जाता है और समय-समय पर इसे बढ़ाया जाता है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से राज्य के कर्मचारियों को केंद्र सरकार के समान आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
राज्य के कर्मचारियों के लिए यह फैसला एक बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि इससे उनके वेतन में वृद्धि होगी और महंगाई की मार को कुछ हद तक कम किया जा सकेगा। सरकार के लिए अब चुनौती यह होगी कि वह इस आदेश को शीघ्रता से लागू कर आर्थिक संतुलन बनाए रखे और कर्मचारियों के हितों का ध्यान रखे।
इस बीच, कर्मचारियों की उम्मीदें बढ़ गई हैं कि जल्द ही राज्य सरकार द्वारा डीए में यह बढ़ोतरी लागू कर उनके वित्तीय संकट को कम किया जाएगा।
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