April 21, 2026

संकटों को हरने वाली एकदंत संकष्टी चतुर्थी 2025 कल, जानिए व्रत की संपूर्ण विधि और महत्त्व

क्या आप जानते हैं कि 16 मई की रात चंद्रमा के दर्शन और गणेश व्रत की साधना आपके जीवन की सभी बाधाओं को दूर कर सकती है? हर महीने आने वाली संकष्टी चतुर्थी विशेष मानी जाती है, लेकिन ज्येष्ठ माह की चतुर्थी तिथि को मनाई जाने वाली एकदंत संकष्टी चतुर्थी का अपना विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्त्व है। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है, जिन्हें ‘विघ्नहर्ता’ कहा जाता है, यानी जो सभी प्रकार के संकटों का नाश करते हैं।

कब है एकदंत संकष्टी चतुर्थी व्रत 2025?
इस बार एकदंत संकष्टी चतुर्थी व्रत शुक्रवार, 16 मई 2025 को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि की शुरुआत 16 मई को सुबह 04:02 बजे होगी और इसका समापन 17 मई को सुबह 05:13 बजे होगा। चूंकि 16 मई को चतुर्थी की उदयातिथि है, इसलिए इसी दिन व्रत रखा जाएगा। इस दिन चंद्रोदय रात्रि 10:39 बजे होगा और उसी समय चंद्र पूजन कर व्रत खोला जाएगा।

पूजा की विधि – ऐसे करें एकदंत संकष्टी व्रत
व्रत वाले दिन प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र पहन लें। फिर भगवान गणेश के सामने बैठकर व्रत का संकल्प लें। शुद्ध जल या गंगाजल से श्रीगणेश का अभिषेक करें। उन्हें पीले वस्त्र पहनाकर चंदन, हल्दी, कुमकुम आदि से श्रृंगार करें। भगवान को दूर्वा घास, लाल-पीले फूल, मोदक व लड्डुओं का भोग अर्पित करें।
इसके बाद धूप-दीप जलाएं और “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें अथवा गणेश चालीसा का पाठ करें। पूजा के अंत में गणपति की आरती करें। रात को चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दें और फिर व्रत खोलें।

एकदंत चतुर्थी का पौराणिक और धार्मिक महत्त्व
एकदंत का अर्थ होता है – एक दांत वाला, और इसके पीछे एक पौराणिक कथा है। मान्यता है कि भगवान परशुराम ने एक बार अपने परशु से गणेशजी पर प्रहार किया था, जिससे उनका एक दांत टूट गया। तभी से उन्हें ‘एकदंत’ कहा जाने लगा। इस दिन गणेशजी की आराधना से जीवन के सभी संकट और विघ्न दूर होते हैं। विशेष रूप से माताएं यह व्रत रखती हैं ताकि उनके बच्चों की उम्र लंबी हो, घर में सुख-शांति बनी रहे और समृद्धि बनी रहे।

मान्यता है कि एकदंत संकष्टी चतुर्थी का व्रत न केवल सांसारिक कष्टों को हरता है, बल्कि साधक की सभी मनोकामनाएं भी पूर्ण करता है। यही कारण है कि हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालु इस दिन विशेष श्रद्धा के साथ उपवास रखते हैं और प्रभु गणेश से अपने जीवन को मंगलमय बनाने की कामना करते हैं।

इस बार का व्रत आपके लिए एक नई शुरुआत और हर संकट से मुक्ति का द्वार खोल सकता है—बस श्रद्धा, संकल्प और पूजा की शुद्धता ज़रूरी है।

Share this content:

About The Author

error: Content is protected !!