April 30, 2026

भारत के अन्न भंडार पर संकट की आशंका? कृषि मंत्री का भरोसा—”हम तैयार हैं, निश्चिंत रहें”

क्या भारत के नागरिकों को आने वाले दिनों में अनाज संकट का सामना करना पड़ेगा? क्या सीमा पर तनाव का असर देश की खाद्य आपूर्ति पर पड़ेगा? इन तमाम अटकलों और चिंताओं के बीच देश के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक बड़ा और भरोसा दिलाने वाला बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि “देश के अन्न भंडार पूरी तरह सुरक्षित हैं और किसी भी आपात स्थिति में भी नागरिकों को घबराने की जरूरत नहीं है।”

पाकिस्तान के साथ सैन्य तनाव और क्षेत्रीय अस्थिरता के इस माहौल में जब देशवासियों के मन में खाद्य आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता पैदा हो रही थी, तब शिवराज सिंह चौहान ने सामने आकर पूरे देश को आश्वस्त किया। उन्होंने कहा—”हम सक्षम हैं, सजग हैं और संकल्पित हैं। सीमाओं पर हमारे जवान डटे हैं और खेतों में हमारे किसान पसीना बहा रहे हैं।”

उन्होंने यह भी बताया कि इस वर्ष बंपर फसल हुई है और आने वाली फसलों के लिए भी मौसम व स्थिति पूरी तरह अनुकूल है। देश के गोदाम गेहूं, चावल और अन्य अनाजों से भरे पड़े हैं। कृषि मंत्री ने भरोसा दिलाया कि किसी भी तरह की खाद्य असुरक्षा की कोई संभावना नहीं है।

शिवराज सिंह चौहान ने खाद्य सुरक्षा को सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी बताया और यह भी जोड़ा कि “यह नया भारत है, जो सिर्फ सीमाओं पर ही नहीं, खेतों में भी आत्मनिर्भर और सशक्त है।”

सिर्फ आंतरिक जरूरतें ही नहीं, भारत आज वैश्विक खाद्य बाजार में भी अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रहा है। उन्होंने बताया कि भारत ने वित्त वर्ष 2025 में दिसंबर तक 2.97 करोड़ अमेरिकी डॉलर मूल्य के मोटे अनाज का निर्यात किया है। यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। साल 2020-21 में यह निर्यात 2.60 करोड़ डॉलर था, जो 2021-22 में बढ़कर 2.85 करोड़ डॉलर और 2022-23 में 3.98 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया।

हालांकि एक अहम पहलू यह भी है कि आगामी आर्थिक नीतियों में कुछ बदलाव की तैयारी की जा रही है। बजट-पूर्व दस्तावेज में सुझाव दिया गया है कि देश को अनाज के अत्यधिक उत्पादन की प्रवृत्ति को संतुलित करना चाहिए और दलहन व खाद्य तेलों के उत्पादन पर जोर देना चाहिए, क्योंकि इन क्षेत्रों में भारत अभी भी आयात पर निर्भर है।

आर्थिक समीक्षा 2024-25 में इस बात पर खास ज़ोर दिया गया है कि कृषि क्षेत्र में अभी भी अपार संभावनाएं हैं, जिनका पूरा दोहन नहीं हो पाया है। इसका अर्थ है कि आने वाले समय में सरकार कृषि नीति में और भी गहरे सुधार ला सकती है, जिससे भारत खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में और तेज़ी से बढ़ सके।

निष्कर्षतः, इस समय जब सीमा पर हालात संवेदनशील हैं, कृषि मंत्री की यह स्पष्ट और भरोसेमंद घोषणा देशवासियों को यह यकीन दिलाती है कि भारत न केवल अपने लोगों को सुरक्षित रख सकता है, बल्कि उन्हें भरपूर अन्न और पोषण भी सुनिश्चित कर सकता है—चाहे कैसी भी स्थिति हो।

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