चलती सड़क पर गोलियों की गूंज: सहरसा में डिप्टी मेयर पर हमला, बाल-बाल बचे राजद नेता गुड्डू हयात
बिहार के सहरसा जिले की एक शांत सी सुबह अचानक गोलियों की आवाज़ से दहल उठी। भीड़भाड़ वाले बाजार क्षेत्र में एक के बाद एक फायरिंग की आवाज़ सुनते ही लोग दहशत में इधर-उधर भागने लगे। चश्मदीदों ने जब पीछे मुड़कर देखा, तो नजर आई एक थार गाड़ी, जिसकी विंडशील्ड पर गोली के निशान थे। यह गाड़ी किसी आम व्यक्ति की नहीं, बल्कि सहरसा नगर निगम के डिप्टी मेयर और राजद नेता उमर हयात उर्फ गुड्डू हयात की थी। कुछ ही क्षणों में खबर फैली कि उन्हें जान से मारने की कोशिश की गई, लेकिन वे बाल-बाल बच गए।
खुद के होटल के सामने जानलेवा हमला
पूरा मामला सदर थाना क्षेत्र के रिफ्यूजी कॉलोनी चौक का है, जहां गुड्डू हयात अपने होटल के बाहर अपनी थार गाड़ी खड़ी कर अंदर किसी काम से गए थे। इसी दौरान, बाइक सवार दो अज्ञात बदमाश वहां पहुंचे और बिना किसी हिचकिचाहट के ड्राइवर सीट के सामने की विंडशील्ड पर गोली चला दी। अपराधियों को शायद यह लगा कि गुड्डू हयात गाड़ी में ही मौजूद हैं। पहला शॉट चलाने के बाद जैसे ही लोग बाहर आए, बदमाशों ने एक और फायरिंग की और मौके से फरार हो गए।
सीसीटीवी फुटेज से सुराग तलाश रही पुलिस
घटना की जानकारी मिलते ही सदर थाना और TOP बटराहा की पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे इलाके को घेर लिया। पुलिस आस-पास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि अपराधियों की पहचान की जा सके। घटनास्थल पर मौजूद लोगों से पूछताछ भी शुरू कर दी गई है। हालांकि, अब तक हमलावरों के बारे में कोई ठोस सुराग नहीं मिला है।
परिवार में डर, इलाके में आक्रोश
हमले की खबर मिलते ही डिप्टी मेयर के घर पर लोगों की भीड़ लग गई। उनके रिश्तेदार, पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक भारी संख्या में जुटे और घटना को लेकर आक्रोश जताया। गुड्डू हयात के परिवार में डर का माहौल है और वे इस हमले से बेहद आहत हैं। लोगों ने पुलिस से तुरंत कार्रवाई की मांग की और अपराधियों को जल्द पकड़ने की गुहार लगाई।
बड़ा सवाल: आखिर पुलिस कहां थी?
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर सहरसा के मुख्य बाजार की सड़क पर अपराधी इतनी हिम्मत कैसे कर गए? दिनदहाड़े हमला और पुलिस की कोई मौजूदगी न होना, कहीं न कहीं स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। क्या पुलिस की गश्ती में लापरवाही थी? या अपराधियों को किसी अंदरूनी जानकारी का सहारा था? इन सवालों के जवाब अब पुलिसिया जांच पर निर्भर हैं।
सहरसा की यह वारदात न केवल कानून व्यवस्था की पोल खोलती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि बिहार में अपराधी अब नेताओं को भी खुली चुनौती देने से नहीं डरते।
Share this content:
