भारत IMF बैठक में पाकिस्तान का आतंकी चेहरा करेगा उजागर, लोन पैकेज को बताया वैश्विक आतंकवाद को समर्थन
आज अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की एक बेहद अहम बैठक होने जा रही है, जिसमें पाकिस्तान के लिए वित्तीय राहत पैकेज पर चर्चा की जाएगी। इस बैठक में भारत भी एक सदस्य देश के तौर पर हिस्सा लेगा और पाकिस्तान की आर्थिक मदद के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराएगा। भारत का रुख स्पष्ट है—पाकिस्तान को किसी भी तरह की आर्थिक मदद देना, वास्तव में वैश्विक आतंकवाद को प्रोत्साहित करना है।
भारत IMF के मंच का उपयोग करते हुए यह बताने की तैयारी में है कि पाकिस्तान लगातार आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देता आया है और उसकी सरकार उन संगठनों को संरक्षण देती है जो भारत सहित अन्य देशों में आतंक का विस्तार कर रहे हैं। ऐसे में उसे आर्थिक पैकेज देना सिर्फ उसकी आतंकी नीतियों को ईंधन देना होगा। भारत अन्य सदस्य देशों को भी यह समझाने की कोशिश करेगा कि अगर पाकिस्तान को वित्तीय सहायता दी जाती है, तो इसका दुष्प्रभाव वैश्विक सुरक्षा पर पड़ेगा।
हालांकि, भारत के विरोध के बावजूद इस बात की प्रबल संभावना है कि पाकिस्तान को यह लोन पैकेज मिल जाएगा। इसका प्रमुख कारण यह है कि IMF में अमेरिका और चीन जैसे दो बड़े हिस्सेदार देश हैं, जिनकी ओर से पाकिस्तान को लोन दिए जाने पर किसी तरह के विरोध की संभावना नहीं है। इन दोनों देशों के रुख को देखते हुए भारत की आपत्तियों के बावजूद पाकिस्तान को राहत मिलने की संभावना बनी हुई है।
यह पूरा मामला ऐसे समय में सामने आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है। 7 मई को कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई की, जिससे पाकिस्तान की स्थिति और भी अस्थिर हो गई है। भारत की जवाबी कार्रवाई के बाद पाकिस्तान सरकार बुरी तरह बौखला गई है और अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खुद को संकटग्रस्त दिखाकर मदद की गुहार लगा रही है।
पाकिस्तान के आर्थिक सलाहकार विभाग की ओर से हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट किया गया, जिसमें उसने विश्व बैंक और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से अतिरिक्त लोन देने की अपील की। पोस्ट में कहा गया कि “हम युद्ध जैसे हालात और गिरते हुए शेयर बाजार के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की अपील करते हैं।” इस अपील में यह भी कहा गया कि पाकिस्तान की जनता को इस कठिन समय में एकजुट और दृढ़ रहना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है। विदेशी मुद्रा भंडार लगातार घट रहा है, महंगाई चरम पर है और सरकार के पास सामाजिक योजनाओं तक को चलाने के लिए धन नहीं बचा है। ऐसे में पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से भीख मांगने की स्थिति में पहुंच गया है। लेकिन भारत इस बात को सुनिश्चित करने की कोशिश करेगा कि पाकिस्तान को तब तक कोई आर्थिक सहायता न मिले जब तक वह आतंक के खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाता।
भारत की रणनीति स्पष्ट है—IMF जैसे वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान को बेनकाब करना और यह दिखाना कि वित्तीय सहायता के नाम पर आतंक को बढ़ावा देना एक खतरनाक गलती होगी। भारत का यह भी मानना है कि आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक लड़ाई में दोहरापन नहीं होना चाहिए। अगर एक ओर आतंकवाद की निंदा की जाती है और दूसरी ओर उसे संरक्षण देने वाले देशों को राहत दी जाती है, तो यह नीति विफल हो जाएगी।
भारत के इस रुख से यह संदेश स्पष्ट है कि अब वह केवल सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि कूटनीतिक और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंचों पर भी आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई को और धार देने की रणनीति पर काम कर रहा है।
Share this content:
