“पंखे से लटकी लाशें और अधूरी कहानियाँ – जब ज़िंदगी हार मान लेती है…”
लखनऊ और आसपास के इलाकों में बीते कुछ दिनों में आत्महत्याओं की एक के बाद एक दुखद घटनाएं सामने आई हैं। तीन युवाओं ने अलग-अलग परिस्थितियों में फांसी लगाकर अपनी जान दे दी, जिनमें एक विवाहिता, एक छात्र और एक सरकारी इंजीनियर शामिल हैं। इन घटनाओं ने न केवल उनके परिवारों को बल्कि पूरे समाज को स्तब्ध कर दिया है।
पहली घटना: बाजारखाला की विवाहिता साफिया ने तोड़ी सांसें
बाजारखाला के बिल्लौचपुरा मोहल्ले में 22 वर्षीय विवाहिता साफिया ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उसका पति आसिफ एक मीट की दुकान पर काम करता है। सोमवार देर शाम जब आसिफ घर लौटा, तो उसने देखा कि साफिया पंखे से दुपट्टे के सहारे झूल रही थी। पुलिस को बुलाया गया, लेकिन तब तक साफिया दम तोड़ चुकी थी। आत्महत्या के कारणों का अब तक पता नहीं चल सका है। परिवार और आस-पड़ोस के लोग गहरे सदमे में हैं।
दूसरी घटना: तेलीबाग में छात्र तारिक सिद्दीकी ने की आत्महत्या
तेलीबाग की एल्डिको कॉलोनी में रहने वाले 22 वर्षीय छात्र तारिक सिद्दीकी ने भी फांसी लगाकर जान दे दी। वह हिमाचल प्रदेश के एक कॉलेज से डी फार्मा की पढ़ाई कर रहे थे और छह महीने पहले उनकी सगाई हुई थी। तारिक, सईद सिद्दीकी के बेटे थे, जिनके चाचा जमाल सिद्दीकी भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। यह आत्महत्या भी रहस्य में डूबी हुई है, क्योंकि तारिक के परिवार ने अभी तक कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया है।
तीसरी और सबसे विचलित करने वाली घटना: जन्मदिन पर सरकारी इंजीनियर की आत्महत्या
प्रयागराज जल निगम में तैनात 34 वर्षीय साकिब अहमद, लखनऊ के इंदिरानगर सेक्टर-बी स्थित जल निगम कॉलोनी में रहते थे। उनकी शादी सात महीने पहले मड़ियांव की सुबुल से हुई थी। रविवार रात वे ससुराल से लौटे थे और अगली सुबह जब उनकी बहन बुतुल मिलने पहुंची, तो दरवाजा अंदर से बंद मिला। कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर पुलिस को बुलाया गया। दरवाजा तोड़ा गया, और कमरे के अंदर साकिब की लाश पंखे से लटकी मिली।
साकिब की जेब से मिला सुसाइड नोट इस पूरी घटना की भयावहता को और गहरा कर देता है। उन्होंने लिखा, “मैं डिप्रेशन में हूं। पांच दिन से सोया नहीं हूं। घुट-घुट कर जीने से अच्छा है खुद को खत्म कर लूं। हालांकि यह गलत है… मेरे शव को बहन की कब्र के बगल में दफनाया जाए। सबको माफ कर दिया है।” यह नोट उनकी मानसिक स्थिति और टूटन को उजागर करता है।
तीनों मामलों में पुलिस जांच जारी है। हालांकि कोई स्पष्ट साजिश सामने नहीं आई है, लेकिन इन आत्महत्याओं के पीछे छिपे मानसिक, सामाजिक और पारिवारिक तनावों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
इन घटनाओं ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों को गंभीरता से लेना अब वक्त की सबसे बड़ी ज़रूरत बन चुका है।
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