भारत-पाकिस्तान तनाव से सोने की कीमतों में तेजी, डाबर इंडिया को मुनाफे में झटका
भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर आज कमोडिटी बाजार पर भी देखने को मिला, जहां सोने की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। निवेशकों ने अनिश्चितता के इस माहौल में सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में गोल्ड की ओर रुख किया, जिससे इसकी कीमतों में उछाल आया।
दूसरी ओर, हेल्थकेयर और एफएमसीजी सेक्टर की प्रमुख कंपनी डाबर इंडिया लिमिटेड को जनवरी-मार्च तिमाही में मुनाफे के मोर्चे पर गिरावट का सामना करना पड़ा। कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 8.2% घटकर ₹313 करोड़ रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह ₹341 करोड़ था।
एक साल में 14% गिरी कंपनी की हिस्सेदारी
बाजार में भी डाबर के प्रदर्शन पर असर देखा गया। गुरुवार को कंपनी का शेयर 0.12% की हल्की गिरावट के साथ ₹480 पर बंद हुआ। बीते एक महीने में कंपनी के शेयर में 6% की वृद्धि दर्ज की गई है, लेकिन पिछले छह महीनों में यह 10% तक गिर चुका है। एक साल की बात करें तो इसमें 14% की गिरावट आई है।
वर्तमान में डाबर इंडिया का बाजार पूंजीकरण ₹85,220 करोड़ है, जो कंपनी के मजबूत ब्रांड पोर्टफोलियो और व्यापक उपभोक्ता आधार को दर्शाता है।
140 साल पुरानी विरासत वाली कंपनी
डाबर इंडिया लिमिटेड की शुरुआत 1884 में डॉ. एस. के. बर्मन ने की थी। उन्होंने इस कंपनी की नींव एक छोटे से कमरे से रखी, जहां वे आयुर्वेदिक दवाएं बनाकर उन लोगों तक पहुंचाते थे जिनकी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच नहीं थी। समय के साथ डाबर ने उपभोक्ताओं के बीच अपनी मजबूत पहचान बनाई।
आज डाबर के पास कई लोकप्रिय ब्रांड्स हैं जैसे –
डाबर च्यवनप्राश, डाबर हनी, डाबर पुदीन हारा, डाबर लाल तेल, और पर्सनल केयर सेगमेंट में डाबर आंवला हेयर ऑयल और डाबर रेड टूथपेस्ट जैसे उत्पाद शामिल हैं।
भविष्य में कंपनी को अपने पारंपरिक उत्पादों के साथ-साथ हेल्थ व वेलनेस कैटेगरी में नवाचार और प्रतिस्पर्धा से जूझना होगा, ताकि वह मुनाफा और बाजार हिस्सेदारी दोनों को बनाए रख सके।
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