एक्सिस बैंक में 100 से अधिक सीनियर अधिकारियों की छंटनी, बैंकिंग इंडस्ट्री में परफॉर्मेंस आधारित कल्चर की ओर बड़ा संकेत
भारत के तीसरे सबसे बड़े प्राइवेट बैंक एक्सिस बैंक ने अपने सैकड़ों वरिष्ठ अधिकारियों को नौकरी छोड़ने के लिए कहा है। यह कदम बैंक की नियमित परफॉर्मेंस अप्रेजल प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है, लेकिन बैंकिंग सेक्टर में यह एक बड़ी हलचल के रूप में देखा जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, छंटनी का यह फैसला 100 से अधिक सीनियर स्टाफ पर लागू हुआ है, जो लंबे समय से बैंक की विभिन्न शाखाओं और विभागों में कार्यरत थे।
परफॉर्मेंस अप्रेजल का हिस्सा है यह छंटनी: एमडी अमिताभ चौधरी
एक्सिस बैंक के प्रबंध निदेशक और सीईओ अमिताभ चौधरी ने 24 अप्रैल को मार्च तिमाही के नतीजों की घोषणा के दौरान इस विषय में स्पष्ट किया कि यह निर्णय किसी अचानक लिए गए कदम का परिणाम नहीं है, बल्कि हर साल की तरह इस बार भी एक विस्तृत वार्षिक परफॉर्मेंस अप्रेजल प्रक्रिया के अंतर्गत लिया गया है।
उन्होंने कहा, “हर संगठन की तरह, एक्सिस बैंक भी प्रत्येक वित्त वर्ष के अंत में विस्तृत मूल्यांकन प्रक्रिया अपनाता है। इस प्रक्रिया में जिनका प्रदर्शन बेहतर होता है, उन्हें पुरस्कृत किया जाता है, प्रमोट किया जाता है। वहीं जो अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरते, उनके संबंध में कठिन निर्णय भी लिए जाते हैं।”
बैंकिंग सेक्टर में प्रतिस्पर्धा और दबाव
अमिताभ चौधरी ने यह भी कहा कि बैंकिंग सेक्टर आज कई तरह की चुनौतियों से जूझ रहा है। कुछ व्यवसाय उभरते हैं, तो कुछ दबाव में रहते हैं। ऐसे में बैंक को लगातार अपने संसाधनों को दोबारा व्यवस्थित करना पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि, “जब हम कुछ क्षेत्रों में भारी निवेश करते हैं, तो हमें यह सुनिश्चित करना होता है कि हमारी टीम के सभी सदस्य प्रदर्शन के मामले में प्रभावी हों। यही कारण है कि परफॉर्मेंस अप्रेजल के बाद छंटनी भी एक अनिवार्य प्रक्रिया बन जाती है।”
एक्सिस बैंक की मार्च 2025 की तिमाही के नतीजे दर्शाते हैं कि बैंक के मुनाफे में हल्की सुस्ती देखी गई है। इस वर्ष की चौथी तिमाही में बैंक ने 7,117 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी अवधि में हुए 7,130 करोड़ रुपये के मुनाफे से मामूली कम है।
ब्याज से होने वाली आय में भी वृद्धि अपेक्षाकृत कम रही है। जहां FY 2024 में बैंक की ब्याज आय 13,089 करोड़ रुपये थी, वहीं FY 2025 में यह 13,811 करोड़ रुपये रही, जो मात्र 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है।
कर्मचारियों में असमंजस, लेकिन ट्रेंड साफ
हालांकि बैंक इस छंटनी को नियमित प्रक्रिया का हिस्सा बता रहा है, लेकिन कर्मचारियों के बीच इसे लेकर आशंका और असमंजस का माहौल बना हुआ है। कई कर्मचारी इसे अचानक लिया गया कठोर निर्णय मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे एक नए कार्यसंस्कृति की शुरुआत के रूप में देख रहे हैं – जहां ‘परफॉर्म या परिश्रम करो’ का सिद्धांत पहले से कहीं अधिक प्रभावी रूप ले रहा है।
आगे क्या?
बैंकिंग इंडस्ट्री में यह रुझान नया नहीं है, लेकिन सीनियर स्टाफ की इतने बड़े स्तर पर छंटनी इस बात का संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन और अधिक सख्त हो सकता है। एक्सिस बैंक के इस कदम से दूसरे निजी बैंकों में भी ऐसी ही प्रक्रियाओं को अपनाने का रास्ता खुल सकता है, खासकर ऐसे समय में जब आर्थिक वातावरण में अनिश्चितता बनी हुई है और तकनीकी बदलाव संस्थानों को अपनी रणनीतियों में लचीलापन और दक्षता लाने को बाध्य कर रहे हैं।
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