April 25, 2026

भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान इस रेटिंग एजेंसी ने घटाया, जानें वजह और नई वृद्धि दर

दुनिया की प्रमुख रेटिंग एजेंसी एसएंडपी (S&P Global Ratings) ने चालू वित्त वर्ष (FY2025-26) के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को 0.2 प्रतिशत घटाकर 6.3 प्रतिशत कर दिया है। पहले एसएंडपी ने भारत की जीडीपी वृद्धि दर को 6.5 प्रतिशत के स्तर पर रहने का अनुमान जताया था, लेकिन अब उन्होंने इस आंकड़े में कटौती की है। इसके अलावा, एजेंसी ने 2026-27 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.5 प्रतिशत रहने की संभावना जताई है, जो इस समय के बाद की अवधि के लिए अपेक्षित वृद्धि दर है।

एसएंडपी का यह अनुमान भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिरता और विकास को लेकर संभावनाओं पर आधारित है। इस अनुमान में कमी का मुख्य कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डालने वाली अमेरिकी व्यापार नीति और उसके प्रभाव के तौर पर देखा जा रहा है। एसएंडपी ने अपने रिपोर्ट में कहा है कि इस समय दुनिया भर में संरक्षणवादी नीतियों का उभार हो रहा है, जिसके कारण व्यापारिक संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में कोई भी देश इन परिस्थितियों में विजेता नहीं बन सकता है।

रेटिंग एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की जीडीपी वृद्धि में यह कमी अमेरिकी शुल्क नीति पर बनी अनिश्चितता के कारण हो रही है, जो अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। एसएंडपी ने मार्च में पहले अपने अनुमान को 6.7 प्रतिशत से घटाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया था, और अब उस अनुमान को और घटाते हुए इसे 6.3 प्रतिशत पर लाया गया है।

इसके साथ ही, एसएंडपी ने एशिया-प्रशांत की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से चीन की वृद्धि दर के बारे में भी भविष्यवाणी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में चीन की वृद्धि दर 3.5 प्रतिशत तक गिरने की संभावना है, और 2026 में यह और घटकर 3 प्रतिशत हो सकती है।

भारत के लिए इस अनुमान में कमी के बावजूद, देश की अर्थव्यवस्था अभी भी वैश्विक संदर्भ में अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में बनी हुई है। भारतीय बाजार और सरकार ने कई सुधार और निवेश योजनाओं के जरिए विकास को बढ़ावा देने की कोशिश की है, जिसके चलते भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी गति बनाए हुए है। हालांकि, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का असर देश की वृद्धि दर पर पड़ सकता है, और यह भारत के विकास की गति को प्रभावित कर सकता है।

एसएंडपी की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण समय हो सकता है, लेकिन इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास की संभावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

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