इंडिया के घर-घर में पाकिस्तानी… इधर खान फवाद की फिल्म पर रोक, उधर PAK एक्टर ने खड़े किए ये सवाल
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद पूरे देश में गुस्से का माहौल है। इस हमले में आतंकियों ने निर्दोष लोगों को निशाना बनाकर उन्हें बेरहमी से मार डाला, जिससे जनता के साथ-साथ सरकार भी सख्त कदम उठाने के मूड में नजर आ रही है। इस हमले के बाद न सिर्फ सुरक्षा मामलों में बल्कि सांस्कृतिक और मनोरंजन जगत में भी भारत ने सख्ती दिखाई है। इसका सीधा असर भारत-पाकिस्तान के सांस्कृतिक रिश्तों पर भी देखने को मिल रहा है।
पाकिस्तानी अभिनेता फवाद खान की आगामी हिंदी फिल्म ‘अबीर गुलाल’ को भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया है। यह फिल्म 9 मई को रिलीज होनी थी, लेकिन सरकार ने देश की मौजूदा भावनाओं और स्थिति को देखते हुए इसके प्रदर्शन पर रोक लगा दी है। इसके अलावा, 30 अप्रैल को भारत सरकार ने कई पाकिस्तानी कलाकारों के इंस्टाग्राम अकाउंट को भारत में बैन कर दिया है। इनमें कई जाने-माने चेहरों के नाम शामिल हैं, जिन्हें भारतीय दर्शकों का खासा प्यार मिलता रहा है। यह कदम भी सरकार की ओर से आतंकवाद के खिलाफ चल रही सख्त नीति का हिस्सा माना जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पाकिस्तानी अभिनेता तौसीक हैदर का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें उन्होंने भारत सरकार की इस कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ फवाद खान की फिल्म को भारत में रिलीज होने से रोका जा रहा है, जबकि दूसरी ओर भारतीय घरों में पाकिस्तानी टीवी शो और ड्रामे काफी लोकप्रिय हैं और खुलेआम देखे जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय दर्शक इन पाकिस्तानी कार्यक्रमों को बहुत प्यार देते हैं और ऐसे में इस सांस्कृतिक लेन-देन को कैसे रोका जा सकता है।
तौसीक ने आगे कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे की कला और संस्कृति की सराहना करनी चाहिए, न कि उसे राजनीतिक और सुरक्षा मामलों के कारण दबाया जाना चाहिए। उन्होंने यह स्वीकार किया कि क्रिकेट के मामले में भारत की टीम पाकिस्तानी टीम से बेहतर है, लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह वक्त की मांग है कि दोनों देश कला और मनोरंजन के माध्यम से अपने संबंधों को मजबूत करें।
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान के बीच सांस्कृतिक संबंधों और मनोरंजन जगत में पारस्परिक आदान-प्रदान को लेकर बहस छेड़ दी है। एक तरफ आतंकी हमले के बाद भारत सख्त कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग इसे कला की स्वतंत्रता और सांस्कृतिक रिश्तों पर लगाम मान रहे हैं।
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