Raid Review: बिना वर्दी के भी अजय देवगन ने दिखाई ‘हीरोपंती’, जानें कैसी है ये फिल्म
अजय देवगन की सुपरहिट फिल्म ‘रेड’ के सीक्वल ‘रेड 2’ ने आज थिएटर में दस्तक दे दी है, जिसमें इस बार उनके साथ रितेश देशमुख भी अहम भूमिका में नजर आ रहे हैं। बॉलीवुड और साउथ सिनेमा की एक जैसी फिल्मों से ऊब चुके दर्शकों के लिए ‘रेड 2’ एक ताज़गी भरा अनुभव लेकर आई है। फिल्म में पॉलिटिकल एंगल, सशक्त अभिनय और सटीक एडिटिंग का जबरदस्त तालमेल देखने को मिलता है। यह फिल्म न केवल रोमांचक है, बल्कि एक सधी हुई स्क्रिप्ट के साथ दर्शकों को बांधे रखती है।
फिल्म की कहानी 1989 से शुरू होती है जब अजय देवगन का किरदार अमेय पटनायक राजस्थान में पोस्टेड होता है और वह एक महाराज के घर पर अपनी 74वीं रेड के लिए पहुंचता है। फिल्म में पटनायक का डायलॉग—‘राजा को पकड़ने के लिए हमेशा महल जाने की जरूरत नहीं है, सुरंग के बाहर खड़े रहो, भगोड़ा राजा अपने आप हाथ लग जाता है’—एक दमदार अंदाज़ में पेश किया गया है। कहानी में दिलचस्प मोड़ तब आता है जब यह ईमानदार अफसर महाराज से दो करोड़ रुपये की रिश्वत मांगता है, जिससे दर्शकों के मन में सवाल उठता है कि क्या अब पटनायक बिक गया है?
फिल्म में इस सवाल का जवाब धीरे-धीरे खुलता है और इसी रहस्य में बसी है फिल्म की असली ताकत। ‘रेड 2’ अजय देवगन की दमदार परफॉर्मेंस और शानदार निर्देशन के चलते एक मनोरंजक और रोमांचक अनुभव बन जाती है, जिसे थिएटर में जाकर देखना एक अच्छा फैसला साबित हो सकता है।
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