पाकिस्तान पर एक्शन की तैयारी: मोदी ने दी सेना को खुली छूट, 24-36 घंटे में हो सकता है बड़ा प्रहार
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले के बाद अब भारत निर्णायक कार्रवाई की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा चुका है। हमले के एक सप्ताह बाद यानी मंगलवार शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में एक उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक बुलाई, जिसमें उन्होंने आतंकवाद पर करारा प्रहार करने के लिए सेना को “खुली छूट” दे दी। यह निर्णय इतना अहम था कि बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान के साथ थल, जल और वायुसेना के प्रमुख भी मौजूद थे।
सूत्रों के अनुसार पीएम मोदी ने बैठक में साफ शब्दों में कहा कि आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई भारत का राष्ट्रीय संकल्प है, और इसके लिए सैन्य बलों को पूरी स्वतंत्रता दी जा रही है—चाहे वह लक्ष्य तय करना हो, कार्रवाई की टाइमिंग हो या तरीक़ा। इस फैसले को लेकर भारतीय सेना को संकेत मिल चुका है और यह स्पष्ट हो चुका है कि अब “बॉल आर्मी के कोर्ट में” है।
जैसे ही यह खबर पाकिस्तान तक पहुंची, वहां खलबली मच गई। पाकिस्तान सरकार के मंत्रियों तक ने सोशल मीडिया पर चिंता जताई और कुछ नेताओं ने 24 से 36 घंटे के अंदर भारत द्वारा संभावित हमले का काउंटडाउन तक शुरू कर दिया। पाकिस्तानी सूचना मंत्री ने यहां तक कहा कि “पक्की खबर है, भारत हमला करने वाला है।”
पीएम का रहस्यमयी इशारा और पाकिस्तान की घबराहट
मंगलवार दोपहर एक कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी का संबोधन भी सुराग देता नजर आया। उन्होंने कहा, “समय सीमित है और लक्ष्य बड़ा।” भले ही बाद में उन्होंने इसे सामान्य सन्दर्भ में बताने की कोशिश की, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान और आतंकी ठिकानों की ओर संकेत था।
बात सिर्फ भाषण तक सीमित नहीं रही। उसी रात यानी 29-30 अप्रैल की दरम्यानी रात पाकिस्तान ने बॉर्डर पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। बारामूला, कुपवाड़ा, नौशेरा, सुंदरबनी और अखनूर सेक्टरों में बिना किसी उकसावे के पाकिस्तानी सेना ने छोटे हथियारों से गोलीबारी की। भारत की सेना ने इसका मुंहतोड़ जवाब दिया, जिससे साफ जाहिर होता है कि बॉर्डर पर तनाव चरम पर है और कोई भी बड़ी घटना अब कभी भी घट सकती है।
सेना को क्या मिला?
‘खुली छूट’ का मतलब है कि अब जमीनी कमांडर हालात के मुताबिक बिना देरी के कार्रवाई कर सकते हैं। यह फैसला भारत की पारंपरिक रणनीति से हटकर है, जिसमें हर ऑपरेशन के लिए राजनीतिक मंजूरी जरूरी होती थी। अब सेना को यह अधिकार है कि चाहे सटीक हमला हो, गुप्त ऑपरेशन हो या साइबर वार—जिस भी तरीके से आतंकवादियों और उनके नेटवर्क को खत्म किया जा सके, वह तुरंत कार्रवाई कर सकते हैं।
डिफेंस एक्सपर्ट का मानना है कि यह भारत की सैन्य और राजनीतिक इच्छाशक्ति का अद्वितीय मेल है, जो सटीक इंटेलिजेंस के आधार पर बेहद प्रभावी जवाब देने की क्षमता रखता है।
पहले भी हो चुकी हैं बड़ी कार्रवाइयाँ
यह पहली बार नहीं है जब भारत ने सीमा पार जवाबी हमला किया हो। 2016 में उरी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 में पुलवामा के बाद बालाकोट एयर स्ट्राइक ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया था। अब एक बार फिर इतिहास खुद को दोहराने की ओर है, लेकिन इस बार तैयारी ज्यादा पक्की और व्यापक दिखाई दे रही है।
बॉर्डर पर तैयारी और खुफिया समन्वय
सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है। नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्पेशल यूनिट्स ऑपरेशनल रेडीनेस मोड में हैं। निगरानी ड्रोन, सैटेलाइट ट्रैकिंग और इलेक्ट्रॉनिक खुफिया प्रणालियां लगातार सक्रिय हैं। लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों के ठिकानों पर नज़र है। सूत्रों का कहना है कि actionable intelligence पहले से सेना के पास है और सिर्फ संकेत मिलने की देर है।
टारगेटेड ऐक्शन की तैयारी
भारत सिर्फ आतंकियों पर नहीं, बल्कि उन्हें फंडिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट देने वालों पर भी टारगेटेड ऐक्शन कर सकता है। भारत इस बार केवल सीमा पार हमले नहीं, बल्कि एक बहुस्तरीय रणनीति पर काम कर रहा है जिसमें साइबर हमले, आर्थिक दंड और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की घेराबंदी शामिल हो सकती है। यदि भारत यह कदम उठाता है, तो यह संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के आर्टिकल 51 के तहत आत्मरक्षा का वैध अधिकार माना जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में हुई सुरक्षा बैठक को पहलगाम हमले के दोषियों पर निर्णायक कार्रवाई की ‘फाइनल ग्रीन सिग्नल’ माना जा रहा है। आधिकारिक तौर पर भले ही सरकार चुप हो, लेकिन पाकिस्तान और भारत की सैन्य गतिविधियां बता रही हैं कि अब हर कोई संभावित ऐक्शन के लिए तैयार है। भारत ने यह दिखा दिया है कि वह सिर्फ बोलता नहीं, समय आने पर करारा जवाब भी देता है—और शायद अब वह समय बहुत करीब है।
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