युद्ध की गीदड़भभकी से पहले आईना देख ले पाकिस्तान, चिंदी भर डिफेंस बजट पर शेखचिल्ली सा ख्वाब
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का स्तर बहुत तेजी से बढ़ा है। इस हमले में निर्दोष भारतीय नागरिकों की जान गई, जिससे पूरे देश में आक्रोश है। जवाबी कार्रवाई की संभावनाओं के बीच पाकिस्तान के कई नेता और मंत्री भारत के खिलाफ गीदड़भभकी दे रहे हैं। पाकिस्तान के रेल मंत्री मोहम्मद हनीफ अब्बासी ने सार्वजनिक मंच से 130 परमाणु बमों की धमकी दी है। रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ और पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो भी भारत को युद्ध की चेतावनी दे चुके हैं। इसके अलावा पाकिस्तानी सेना के कई छोटे अफसर और सत्ताधारी दल के छुटभैये नेता भी भारत को धमकाने की कोशिश में लगे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की ये सारी बातें केवल मानसिक दबाव बनाने और आंतरिक असुरक्षा को ढकने की कोशिश हैं। असलियत यह है कि पाकिस्तान की मौजूदा आर्थिक और सामरिक स्थिति भारत के सामने बेहद कमजोर है और युद्ध की स्थिति में उसे भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
वर्तमान समय में पाकिस्तान गहरे आर्थिक संकट से गुजर रहा है। देश में महंगाई चरम पर है, बेरोजगारी बढ़ रही है, भुखमरी के हालात बन रहे हैं और विदेशी कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। आईएमएफ जैसी संस्थाओं से कर्ज लेने के लिए पाकिस्तान को कई शर्तें माननी पड़ रही हैं। दूसरी तरफ भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। ऐसे में जब दोनों देशों की आर्थिक क्षमता की तुलना की जाती है तो पाकिस्तान का भारत से मुकाबला करना एक दूर का सपना नजर आता है। विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध सिर्फ हिम्मत से नहीं, बल्कि संसाधनों और दीर्घकालिक तैयारी से जीते जाते हैं, जिसमें पाकिस्तान बहुत पीछे है।
अगर रक्षा बजट की तुलना करें तो स्थिति और भी स्पष्ट हो जाती है। भारत का 2025-26 का रक्षा बजट 6,81,210 करोड़ रुपये है, जबकि पाकिस्तान का कुल रक्षा बजट 2,28,100 करोड़ रुपये है। यानी भारत का रक्षा बजट पाकिस्तान से तीन गुना से भी अधिक है। इस बड़े बजट के दम पर भारत ने अपने तीनों अंगों — थल सेना, वायु सेना और नौसेना — को अत्याधुनिक हथियारों, मिसाइल प्रणालियों, रडार नेटवर्क और साइबर युद्ध क्षमताओं से लैस किया है। वहीं पाकिस्तान के पास पुराने हथियार, सीमित गोला-बारूद और सीमित संसाधनों के अलावा कुछ नहीं बचा है। हालात ये हैं कि हाल ही में पाकिस्तान ने अपने मित्र देश तुर्किए से गोला-बारूद मंगवाना शुरू कर दिया है क्योंकि वह लंबे समय तक युद्ध लड़ने के लिए जरूरी न्यूनतम हथियार भी स्टॉक नहीं कर पा रहा है।
ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स के मुताबिक, जो किसी भी देश की सैन्य क्षमता का मूल्यांकन 60 अलग-अलग मानकों पर करता है, भारत दुनिया की चौथी सबसे शक्तिशाली सेना रखता है। इसके मुकाबले पाकिस्तान का स्थान 12वां है। यह अंतर केवल एक या दो पायदान का नहीं, बल्कि तकनीकी श्रेष्ठता, जनशक्ति, आर्थिक स्थिरता और रणनीतिक संसाधनों के समग्र प्रभाव का परिणाम है। भारत के पास युद्ध के समय अपनी आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने की क्षमता है, जबकि पाकिस्तान को घरेलू अस्थिरता, आतंरिक विद्रोह और विदेशी दबावों का सामना करना पड़ता है।
इतिहास भी इस बात का गवाह है कि जब-जब पाकिस्तान ने भारत से मुकाबला करने की कोशिश की है, उसे करारी हार का सामना करना पड़ा है। 1947, 1965, 1971 और 1999 के कारगिल युद्ध — हर बार पाकिस्तान को पीछे हटना पड़ा और उसकी स्थिति अंतरराष्ट्रीय मंच पर कमजोर हुई। इस बार भी अगर पाकिस्तान भारत से टकराने का दुस्साहस करता है तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। इस सच्चाई को जानते हुए भी अगर पाकिस्तानी नेता भारत को धमकी दे रहे हैं तो यह सिर्फ अपने आंतरिक राजनीतिक असंतोष को शांत करने और जनता का ध्यान भटकाने की एक रणनीति है। पाकिस्तान के पास न तो आर्थिक ताकत है, न सैन्य क्षमता, और न ही अंतरराष्ट्रीय समर्थन कि वह भारत से युद्ध कर सके।
ऐसे में पाकिस्तान को चाहिए कि वह जमीनी हकीकत को समझे, शेखचिल्ली जैसे सपने देखना बंद करे और गीदड़भभकियों की जगह शांति और स्थिरता की दिशा में कदम बढ़ाए। क्योंकि भारत आज केवल एशिया ही नहीं, दुनिया की एक उभरती हुई महाशक्ति है, और उसके सामने खड़े होने के लिए सिर्फ नारेबाजी नहीं, हिम्मत, क्षमता और तैयारी चाहिए — जो पाकिस्तान के पास फिलहाल कहीं नजर नहीं आती।
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