पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान ने तुर्किए से मदद मांगी, चीन ने भी समर्थन जताया
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसरन घाटी में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। भारत के संभावित जवाबी कार्रवाई के डर से पाकिस्तान ने अपने पुराने सहयोगी देश तुर्किए से मदद मांगी है। ओपनसोर्स इंटेलिजेंस के अनुसार, तुर्किए का एक सी-130 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान हाल ही में पाकिस्तान पहुंचा है। सूत्रों का दावा है कि इस विमान में तुर्किए ने पाकिस्तान के लिए भारी मात्रा में गोला-बारूद और अन्य सैन्य साजो-सामान भेजा है। वर्तमान हालात में पाकिस्तानी सेना गोला-बारूद और फ्यूल की भारी कमी से जूझ रही है और ऐसे में उसके लिए लंबी अवधि का युद्ध लड़ना संभव नहीं है।
विशेष ध्यान देने वाली बात यह है कि जिस दिन पहलगाम में निहत्थे भारतीय नागरिकों का नरसंहार हुआ, उसी दिन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अंकारा में तुर्किए के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन से गर्मजोशी से मिल रहे थे। तस्वीरों और वीडियो में दोनों नेताओं को हंसते और गले मिलते हुए देखा गया था, जिसने इस पूरी घटना पर कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। दुनिया के अधिकांश देश पाकिस्तान के आतंकवाद से जुड़ी नीतियों से दूरी बना चुके हैं, लेकिन तुर्किए अभी भी उन गिने-चुने देशों में शामिल है जो पाकिस्तान का समर्थन करते हैं। तुर्किए समय-समय पर संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर का मुद्दा भी उठाता रहा है, जिससे भारत विरोधी भावनाओं को हवा मिलती रही है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच चीन ने भी पाकिस्तान का खुलकर समर्थन किया है। न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान के साथ एकजुटता दिखाई है और इस आतंकी हमले की निष्पक्ष और शीघ्र जांच कराए जाने की अपील की है। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ के अनुसार, चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार के साथ रविवार को टेलीफोन पर बातचीत की। इस दौरान डार ने वांग को कश्मीर क्षेत्र में हुए आतंकवादी हमले और उसके बाद पाकिस्तान और भारत के बीच बढ़ते तनाव की विस्तृत जानकारी दी।
चीन ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वह इस पूरी स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है। वांग यी ने जोर दिया कि आतंकवाद से लड़ना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है और चीन, आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान के प्रयासों का लगातार समर्थन करता रहेगा। उन्होंने कहा कि चीन एक मजबूत मित्र और हर मौसम में रणनीतिक साझेदार के तौर पर पाकिस्तान की वैध सुरक्षा चिंताओं को पूरी तरह समझता है और उसकी संप्रभुता और सुरक्षा हितों की रक्षा करने के प्रयासों में मजबूती से उसके साथ खड़ा है।
चीन का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब पाकिस्तान भारत पर अंतरराष्ट्रीय जांच समिति के माध्यम से पहलगाम आतंकी हमले की जांच कराने का दबाव बना रहा है। पाकिस्तान चाहता है कि इस हमले की जांच भारत-पाक के बीच न होकर किसी तटस्थ अंतरराष्ट्रीय एजेंसी द्वारा कराई जाए। इसके विपरीत, अमेरिका पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि यह मामला भारत और पाकिस्तान के बीच का है और अमेरिका इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि दोनों देशों को आपसी बातचीत के जरिए मामले को सुलझाना चाहिए।
वर्तमान परिस्थितियों में पाकिस्तान की कूटनीतिक कोशिशें यह दिखाती हैं कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने पक्ष में माहौल बनाने की पूरी कोशिश कर रहा है। वहीं भारत पहलगाम जैसे जघन्य नरसंहार का बदला लेने के लिए आक्रामक रणनीति अपना सकता है, जिससे दक्षिण एशिया में तनाव और भी बढ़ सकता है। तुर्किए और चीन जैसे देशों का पाकिस्तान के समर्थन में आना निश्चित रूप से भारत के लिए एक कूटनीतिक चुनौती खड़ी कर सकता है, लेकिन वैश्विक समर्थन फिलहाल आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ दिखाई दे रहा है।
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