April 18, 2026

पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान पर बढ़ा अंतरराष्ट्रीय दबाव, सीमा पर 54 आतंकियों का सफाया, चीन ने निष्पक्ष जांच का किया समर्थन

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसरन घाटी में हुए भीषण आतंकी हमले ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी है। इस हमले में 26 निहत्थे नागरिकों की नृशंस हत्या के बाद पाकिस्तान पर चौतरफा दबाव बढ़ गया है। हमले के बाद से पाकिस्तान को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और दुनिया के सामने खुद को आतंकवाद के खिलाफ लड़ने वाला देश साबित करने के लिए कई मोर्चों पर काम करना पड़ रहा है। इसी क्रम में पाकिस्तान की सेना ने दावा किया है कि उसने अफगानिस्तान सीमा से घुसपैठ की कोशिश कर रहे 54 आतंकवादियों को एक बड़े ऑपरेशन में मार गिराया है।

पाकिस्तानी मीडिया समूह एआरवाई न्यूज ने इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) के हवाले से रिपोर्ट दी है कि उत्तरी वजीरिस्तान के हसन खेल इलाके में सुरक्षा बलों ने 25/26 और 26/27 अप्रैल की रात को ख्वारिज समूह के एक बड़े जत्थे की गतिविधियों का पता लगाते ही ऑपरेशन शुरू कर दिया। सेना ने बताया कि ये आतंकी पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पार कर देश में दाखिल होने की फिराक में थे और किसी बड़े आतंकी हमले की योजना बना रहे थे। पाकिस्तानी सेना ने अपनी कार्रवाई में घुसपैठ की इस कोशिश को पूरी तरह विफल करते हुए सभी 54 आतंकियों को मार गिराया। ऑपरेशन के बाद घटनास्थल से भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री भी बरामद की गई है। सेना के मुताबिक खुफिया रिपोर्टों से यह भी पता चला है कि इन आतंकियों को विदेशी आकाओं द्वारा पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर आतंकी हमले करने का आदेश मिला था।

इस घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहलगाम आतंकी हमले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। पाकिस्तान का कहना है कि इस हमले की जांच भारत और पाकिस्तान के बजाय किसी तीसरे, तटस्थ अंतरराष्ट्रीय निकाय से कराई जानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। इस मांग को अब चीन का भी समर्थन प्राप्त हो गया है। ग्लोबल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने पाकिस्तान के डिप्टी प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार से फोन पर बात की और पाकिस्तान को अपना समर्थन देने का आश्वासन दिया। वांग यी ने कहा कि चीन कश्मीर क्षेत्र में हुए आतंकवादी हमले के बाद उत्पन्न तनावपूर्ण स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है और चाहता है कि जल्द से जल्द एक निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच शुरू की जाए। वांग ने यह भी उम्मीद जताई कि भारत और पाकिस्तान दोनों पक्ष संयम बरतेंगे, आपसी संवाद को बढ़ावा देंगे और क्षेत्र में तनाव को कम करने की दिशा में काम करेंगे।

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बातचीत के दौरान यह भी स्पष्ट किया कि आतंकवाद से मुकाबला करना सभी देशों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि चीन हमेशा पाकिस्तान की आतंकवाद रोधी कार्रवाईयों का समर्थन करता रहा है और करता रहेगा। चीन ने एक मजबूत दोस्त और हर मौसम में रणनीतिक सहयोगी के रूप में पाकिस्तान की वैध सुरक्षा चिंताओं को समझने और उसकी संप्रभुता तथा सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए पाकिस्तान के प्रयासों का पूरा समर्थन करने की प्रतिबद्धता दोहराई। वहीं, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी बयान जारी कर बताया कि डिप्टी प्रधानमंत्री इशाक डार ने वांग यी को मौजूदा क्षेत्रीय हालात और पाकिस्तान की चिंताओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी। डार ने चीन के लगातार और अटूट समर्थन की सराहना की और कहा कि पाकिस्तान सभी क्षेत्रों में चीन के साथ द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

चीन की ओर से मिला यह समर्थन उस समय आया है जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पहलगाम आतंकी हमले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की सार्वजनिक मांग की थी। इस बीच, अमेरिका ने साफ कर दिया है कि वह इस मामले में किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं करेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यह भारत और पाकिस्तान के बीच का मामला है और अमेरिका इसमें शामिल होने का इरादा नहीं रखता।

इस घटनाक्रम ने एक बार फिर दक्षिण एशिया क्षेत्र में आतंकवाद और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े सवालों को अंतरराष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला दिया है। जहां एक ओर पाकिस्तान खुद को आतंकवाद के खिलाफ सक्रिय बताने की कोशिश कर रहा है, वहीं भारत ने भी पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान पर आतंकवाद को पनाह देने का गंभीर आरोप लगाया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियां इस मुद्दे को कैसे संभालती हैं और क्या वाकई कोई निष्पक्ष जांच कर पाना संभव हो पाएगा या नहीं।

Share this content:

About The Author

error: Content is protected !!