SIP में सबसे बड़ी गिरावट! ट्रंप के टैरिफ से हिल गया म्यूचुअल फंड बाजार, निवेशकों में बढ़ी चिंता
म्यूचुअल फंड में निवेश को लेकर अगर आप भी भरोसे के साथ आगे बढ़ रहे हैं, तो ये खबर आपके लिए चौंकाने वाली हो सकती है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ का असर अब सीधे-सीधे भारतीय म्यूचुअल फंड मार्केट पर दिखने लगा है। मार्च 2025 के आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि निवेशकों का भरोसा डगमगाने लगा है और वे अब कदम फूंक-फूंक कर रख रहे हैं।
SIP में 4 महीने की सबसे बड़ी गिरावट
मार्च 2025 में सिस्टेमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए म्यूचुअल फंड्स में सिर्फ 25,926 करोड़ रुपए का निवेश आया, जो पिछले चार महीनों में सबसे कम है। SIP जिसे अब तक निवेशकों का सबसे भरोसेमंद जरिया माना जाता रहा है, उसमें आई ये गिरावट निवेश बाजार की चिंताओं को और गहरा करती है।
इक्विटी स्कीम में 14% की गिरावट
Association of Mutual Funds in India (AMFI) के मुताबिक, मार्च 2025 में इक्विटी स्कीम्स में निवेश मंथली बेसिस पर 14 फीसदी गिरकर 25,082 करोड़ रुपए पर आ गया। फरवरी 2025 में यह आंकड़ा 29,303.34 करोड़ रुपए था, जो पहले ही 26 फीसदी की गिरावट के साथ आया था। यानी दो महीनों में निवेश के लिहाज से गिरावट की डबल मार पड़ी है।
ट्रंप का टैरिफ बना गिरावट की बड़ी वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका द्वारा भारत पर लगाया गया 26% टैरिफ निवेशकों के मन में अनिश्चितता और असुरक्षा की भावना पैदा कर रहा है। ट्रंप की सख्त व्यापार नीति ने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी है और इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी पड़ रहा है।
डेट और हाइब्रिड फंड्स से भी निकासी
सिर्फ इक्विटी ही नहीं, बल्कि डेट फंड्स और हाइब्रिड स्कीम्स से भी भारी बिकवाली देखने को मिली है। निवेशक अब जोखिम लेने से कतरा रहे हैं और सुरक्षित विकल्पों की तलाश में हैं।
कौन-कौन से फंड्स प्रभावित हुए?
मार्च 2025 के आंकड़ों में देखा गया कि:
फ्लेक्सी कैप फंड में सबसे ज्यादा 5,615 करोड़ रुपए का निवेश हुआ।
स्मॉल कैप फंड में 4,092.12 करोड़ रुपए का इनफ्लो आया।
मिडकैप फंड को 3,438.87 करोड़ रुपए का निवेश मिला।
मल्टीकैप फंड में 2,752.98 करोड़ रुपए,
लार्ज एंड मिडकैप फंड में 2,718.07 करोड़ रुपए,
लार्ज कैप फंड में 2,479 करोड़ रुपए,
वैल्यू/कांट्रा फंड में 1,553.43 करोड़ रुपए,
फोकस्ड फंड में 1,386.26 करोड़ रुपए और
ELSS फंड्स में 735.38 करोड़ रुपए का निवेश देखा गया।
क्या करें निवेशक?
SIP में गिरावट के बावजूद, एक्सपर्ट्स यह मानते हैं कि यह एक अस्थायी झटका हो सकता है। लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि बाज़ार की चाल को समझकर रणनीतिक रूप से निवेश करना चाहिए।
ट्रंप के टैरिफ की धमक अब भारतीय निवेश बाजार में साफ तौर पर गूंजने लगी है। म्यूचुअल फंड्स, खासकर SIP जैसे भरोसेमंद माध्यम में आई यह गिरावट चिंताजनक है। ऐसे में निवेशकों को सतर्कता के साथ कदम उठाने की जरूरत है—क्योंकि आने वाला वक्त या तो ‘रिटर्न’ देगा या फिर ‘सबक’।
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