क्या अमेरिका से बढ़ा टैरिफ छीन लेगा भारत से अरबों डॉलर का समुद्री कारोबार? सामने आई बड़ी चेतावनी
अमेरिका द्वारा भारत पर बढ़ाए गए टैरिफ ने भारत के समुद्री खाद्य निर्यात क्षेत्र की नींव हिला दी है। विशेषज्ञों की मानें तो इस कदम से भारत का अरबों डॉलर का समुद्री व्यापार संकट में पड़ सकता है, खासकर झींगा निर्यात जो कि अमेरिका को भारत के कुल समुद्री खाद्य निर्यात का 92% हिस्सा बनाता है।
भारतीय समुद्री खाद्य निर्यातक संघ (SEAI) के अध्यक्ष जी. पवन कुमार ने चेताया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अचानक लागू किए गए इस शुल्क के असर से भारत का यह प्रमुख निर्यात क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित होगा। वर्ष 2023-24 में भारत ने अमेरिका को करीब 2.5 अरब डॉलर का समुद्री खाद्य निर्यात किया था, जिसमें झींगा सबसे बड़ा हिस्सा था। लेकिन अब यह पूरा कारोबार भारी दबाव में आ गया है।
टैरिफ हाइक से समुद्री कारोबार पर मंडरा रहा संकट
नए टैरिफ के अनुसार, भारत के समुद्री खाद्य निर्यात पर अब अमेरिका में 16% का अतिरिक्त शुल्क लगेगा। वहीं, भारत को सबसे बड़ा झटका इसलिए भी लग रहा है क्योंकि दक्षिण अमेरिकी देश इक्वाडोर पर मात्र 10% शुल्क लगाया गया है, जिससे वह अमेरिकी बाजार में तेजी से भारत की जगह ले सकता है।
कुमार के अनुसार, भारतीय समुद्री उत्पादों का मौजूदा मुनाफा मार्जिन केवल 4-5% का है, ऐसे में 16% के शुल्क की भरपाई करना लगभग असंभव है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह अंतर भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार से बाहर कर सकता है, जिससे प्रतिस्पर्धा में भारत पिछड़ जाएगा।
अन्य देशों की तुलना में भारत की स्थिति नाजुक
इक्वाडोर पर शुल्क: 10%
वियतनाम पर शुल्क: 46%
इंडोनेशिया पर शुल्क: 32%
इसके बावजूद इक्वाडोर को फायदा होगा क्योंकि वह कम शुल्क और स्थिर आपूर्ति की वजह से अमेरिकी बाजार में भरोसेमंद विकल्प बनता जा रहा है।
600 करोड़ रुपये का झटका और आगे की चुनौतियाँ
कुमार ने कहा कि टैरिफ हाइक से भारतीय निर्यातकों पर कुल असर 600 करोड़ रुपये तक बैठ सकता है। अभी भी करीब 2,000 कंटेनर अमेरिकी बाजार के लिए पारगमन में हैं और ये ऑर्डर ‘डोरस्टेप डिलीवरी’ वाले हैं। इसका मतलब है कि अब इस शुल्क का बोझ निर्यातकों को खुद उठाना पड़ेगा।
सिर्फ इतना ही नहीं, निर्यातकों को अमेरिकी नियमों के तहत बॉन्ड जमा करने और अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के लिए अतिरिक्त कार्यशील पूंजी की जरूरत पड़ेगी, जिससे नकदी प्रवाह और वित्तीय स्थिरता पर गहरा असर पड़ेगा।
अमेरिका पहले से ही लगा रहा है अतिरिक्त शुल्क
नए टैरिफ के अलावा, पहले से ही अमेरिका भारत के झींगा निर्यात पर 5.77% प्रतिपूरक शुल्क और 1.38% डंपिंग रोधी शुल्क लगाता है। अब नए शुल्क के साथ कुल कर भार निर्यातकों पर असहनीय हो सकता है।
सरकार से राहत की मांग
इस संकट को देखते हुए SEAI ने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संघ के अनुसार, जब तक भारत और अमेरिका के बीच कोई स्थायी व्यापार समझौता नहीं होता, तब तक सरकार को इस क्षेत्र को राहत देने के लिए विशेष उपाय करने चाहिए।
SEAI का कहना है कि यदि सरकार ने तुरंत कदम नहीं उठाए, तो भारत न केवल अमेरिका में अपना प्रमुख बाजार खो सकता है, बल्कि हजारों मछुआरों, किसानों और निर्यात से जुड़े लोगों की आजीविका भी खतरे में पड़ जाएगी।
अमेरिका की टैरिफ नीति भारत के समुद्री खाद्य क्षेत्र के लिए बड़े झटके की तरह सामने आई है। यह न केवल एक व्यापारिक चुनौती है, बल्कि एक व्यापक आर्थिक संकट का संकेत भी है। अब देखना होगा कि भारत सरकार इस मुद्दे पर कितनी तेजी से और प्रभावी कदम उठाती है, वरना भारत से अरबों डॉलर का झींगा कारोबार फिसलकर किसी और देश की झोली में जा सकता है।
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