April 20, 2026

सुनसान स्टेशन, झांसे का जाल और दरिंदगी की दास्तान: लखीसराय में 18 वर्षीय युवती से 8 दरिंदों ने किया गैंगरेप, 100 रुपये थमाकर भेजा वापस

बिहार के लखीसराय जिले से एक ऐसी सनसनीखेज घटना सामने आई है, जिसने न केवल प्रदेश को झकझोर दिया है बल्कि समाज की उस सच्चाई को भी उजागर कर दिया है, जहां नौकरी का सपना एक युवती के लिए भयावह यौन उत्पीड़न की दहलीज़ बन गया। यह वारदात केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि विश्वास, मानवता और सुरक्षा के नाम पर एक बड़ा सवाल बनकर उभरी है।

ट्रेन में हुआ झांसा, स्टेशन पर रचा गया षड्यंत्र

18 वर्षीय युवती अपने नानी के घर जा रही थी। सफर के दौरान ट्रेन में उसकी मुलाकात एक युवक से हुई, जिसने खुद को मददगार बताते हुए उसे नौकरी दिलाने का झांसा दिया। बातचीत का सिलसिला ऐसा चला कि युवती उसके झूठे वादों पर भरोसा कर बैठी और युवक के कहने पर लखीसराय के किऊल रेलवे स्टेशन पर उतर गई।

होटल का खाना बना दुष्कर्म की भूमिका

स्टेशन से उतरने के बाद आरोपी उसे पास के एक होटल में ले गया, जहां कुछ अन्य युवक पहले से मौजूद थे। सबने मिलकर खाना खाया, लेकिन युवती को यह आभास नहीं था कि यह सब एक साज़िश का हिस्सा है। खाना खाने के बाद उसे एक सुनसान जगह पर ले जाया गया, जहां पहले से मौजूद आठ युवकों ने बारी-बारी से उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।

100 रुपये में इंसानियत की कीमत

घटना को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने युवती को 100 रुपये थमाते हुए चुपचाप घर लौट जाने को कहा। परंतु इस दरिंदगी से टूटी युवती ने हिम्मत नहीं हारी। वह सीधे कवैया थाना पहुंची और पूरे घटनाक्रम की जानकारी पुलिस को दी।

पुलिस ने की त्वरित कार्रवाई, 6 आरोपी गिरफ्तार

लड़की की शिकायत पर पुलिस तुरंत हरकत में आई और छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। दो अन्य आरोपी फिलहाल फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। लखीसराय के एसडीपीओ शिवम कुमार ने जानकारी दी कि पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए सरकारी अस्पताल भेजा गया है और पूरे मामले की गंभीरता से जांच चल रही है।

सवाल उठाता है यह मामला

यह घटना केवल एक आपराधिक रिपोर्ट नहीं, बल्कि उस खतरनाक सामाजिक मानसिकता की तस्वीर है, जहां एक मासूम लड़की को नौकरी का सपना दिखाकर दरिंदगी की आग में झोंक दिया गया। यह मामला न केवल पुलिस और कानून के लिए चुनौती है, बल्कि समाज के लिए आत्ममंथन का विषय भी है।

अब देखना यह है कि क्या पीड़िता को न्याय मिलेगा? क्या फरार आरोपी जल्द पकड़े जाएंगे? और सबसे बड़ा सवाल – क्या समाज अब भी चुप रहेगा, या ऐसी घटनाओं के खिलाफ कोई निर्णायक सांस्कृतिक बदलाव शुरू होगा?

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