April 17, 2026

पीलीभीत टाइगर रिजर्व में जंगल की आग बनी विकराल, खेतों तक पहुंची लपटें, मुश्किल से पाया काबू

पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के माला रेंज में मंगलवार को लगी आग ने बुधवार तक भीषण रूप धारण कर लिया। जंगल में तेजी से फैल रही आग खेतों के करीब पहुंच गई, जिससे आसपास के ग्रामीणों और किसानों में हड़कंप मच गया। फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियों और किसानों के 10 से अधिक ट्रैक्टरों की मदद से आग पर बमुश्किल काबू पाया गया। किसानों का आरोप है कि वन विभाग की लापरवाही के चलते आग जंगल से सटे इलाकों तक फैल गई, जिससे खेतों में खड़ी फसलें भी संकट में आ गईं।

जंगल से खेतों तक पहुंची आग, किसानों में मचा हड़कंप

पीलीभीत टाइगर रिजर्व में गर्मी और तेज हवाओं के चलते आग लगने की घटनाएं बढ़ रही हैं। प्रशासन ने फायर सीजन को ध्यान में रखते हुए पहले ही सतर्कता बरतने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बावजूद माला रेंज में मंगलवार को अचानक आग भड़क उठी।

हालांकि, वन विभाग की टीम ने तुरंत आग बुझाने के प्रयास शुरू किए, लेकिन हवा तेज होने के कारण बुधवार को आग फिर से विकराल हो गई। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि मथना बैरियर के पास नहर के किनारे से बढ़ती हुई आग जंगल की सीमा को पार कर खेतों की ओर बढ़ने लगी। इसे देखते ही आसपास के किसानों में हड़कंप मच गया।

किसानों ने 10 से अधिक ट्रैक्टरों से रोकी आग

जैसे ही आग मथना जप्ती और पुरैनी दीपनगर की सीमा में पहुंची, सैकड़ों किसान मौके पर एकत्र हो गए। फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियों के अलावा किसानों ने स्प्रे मशीन और खेतों की जुताई कर किसी तरह आग को नियंत्रित किया। देर शाम तक किसान अपने खेतों की रखवाली करते रहे ताकि दोबारा आग न भड़क सके।

ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते आग पर काबू न पाया जाता तो गेहूं की फसल पूरी तरह जलकर राख हो सकती थी। सूचना मिलते ही डायल 112 की टीम भी मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया।

आग लगने के कारणों की जांच में जुटा वन विभाग

फिलहाल, माला जंगल में आग लगने के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल सका है। वन विभाग के अधिकारियों ने घटना की जांच के लिए एसडीओ स्तर के अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी है। डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि आग किन कारणों से लगी और कितने क्षेत्र को नुकसान हुआ, इसकी जांच की जा रही है।

सिर्फ तीन दमकल गाड़ियों पर निर्भर पूरा जिला

पीलीभीत जिले में आग बुझाने के लिए संसाधनों की भारी कमी है। दमकल विभाग के पास सिर्फ तीन बड़े वाहन हैं, जिनमें से एक मुख्यालय, एक पूरनपुर और एक बीसलपुर में तैनात है। इसके अलावा एक फायर बाइक छोटे स्तर की आग बुझाने के लिए उपलब्ध है। इन वाहनों में 2,500 से 5,000 लीटर पानी स्टोरेज करने की क्षमता है।

सीएफओ अनुराग सिंह ने बताया कि संसाधन सीमित होने के बावजूद फायर ब्रिगेड की टीम सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर आग बुझाने में जुट जाती है। हालांकि, जिले में दमकल वाहनों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है ताकि इस तरह की घटनाओं से प्रभावी रूप से निपटा जा सके।

सतर्कता के दावों के बावजूद जंगलों में लगातार बढ़ रही आग की घटनाएं

पांच दिन पहले ही महोफ जंगल में आग लगने से 50 हेक्टेयर का ग्रासलैंड और कई पेड़ जलकर राख हो गए थे। बावजूद इसके पीलीभीत टाइगर रिजर्व में आग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। वन विभाग द्वारा कंट्रोल रूम स्थापित करने और सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन जंगल में दोबारा आग लगना दर्शाता है कि सुरक्षा उपायों में अभी भी खामियां बनी हुई हैं।

किसानों की मांग – वन विभाग करे कड़े इंतजाम

घटनास्थल पर मौजूद किसानों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मांग की है कि जंगलों में आग लगने से रोकने के लिए ठोस उपाय किए जाएं। अगर समय रहते वन विभाग की टीम सतर्क होती, तो आग खेतों तक नहीं पहुंचती।

आग की घटनाओं में बढ़ोतरी के मद्देनजर अब यह आवश्यक हो गया है कि प्रशासन फायर ब्रिगेड की संख्या बढ़ाए, जंगलों में आग लगने की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाए और फायर सीजन के दौरान विशेष सतर्कता बरते। वरना हर साल किसानों को इसी तरह नुकसान उठाना पड़ेगा।

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