वक्फ संशोधन विधेयक पर सियासी संग्राम: हंगामे के बीच क्या सरकार को मिलेगी जीत?
नई दिल्ली। वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर लोकसभा में आज बड़ा राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है। सभी दलों से व्यापक विमर्श के बाद यह विधेयक बुधवार को सदन में पेश किया जाएगा, और माना जा रहा है कि आज ही इसे पारित कर लिया जाएगा। हालांकि, विपक्ष इसके खिलाफ मोर्चा खोले हुए है, जिससे सदन में भारी हंगामे के आसार हैं। सत्ता पक्ष के पास पर्याप्त बहुमत होने के कारण विधेयक को राज्यसभा में भी आसानी से पारित कराए जाने की संभावना जताई जा रही है।
सरकार की रणनीति और विपक्ष की चुनौती
संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि राजग के सभी दल विधेयक के समर्थन में हैं। इसके अलावा, विपक्ष के कुछ सांसदों का भी समर्थन मिलने का दावा किया जा रहा है। कार्यमंत्रणा समिति में इस बिल पर आठ घंटे की चर्चा तय हुई है, लेकिन हंगामे की स्थिति में इसे बढ़ाया जा सकता है। वहीं, कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने सरकार पर उनकी आवाज दबाने का आरोप लगाते हुए इस बैठक का बहिष्कार किया।
अमित शाह की मौजूदगी और विपक्ष की रणनीति
लोकसभा की कार्यवाही के दौरान गृह मंत्री अमित शाह समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेता चर्चा में शामिल होंगे। वहीं, विपक्षी गठबंधन ‘आईएनडीआईए’ ने सरकार के “विभाजनकारी एजेंडे” को हराने के लिए एकजुट रहने का ऐलान किया है। कांग्रेस सहित कई दलों ने अपने सांसदों को तीन दिनों तक सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया है।
राज्यसभा में भी गरमाएगी सियासत?
लोकसभा में पारित होने के बाद यह विधेयक गुरुवार को राज्यसभा में पेश किया जा सकता है। राज्यसभा की कार्यमंत्रणा समिति ने भी इस पर आठ घंटे की चर्चा निर्धारित की है। उच्च सदन में भाजपा के 98 और सहयोगी दलों के 19 सदस्य हैं, जिससे कुल संख्या 125 हो जाती है, जो बहुमत से छह अधिक है। दूसरी ओर, विपक्षी दलों की कुल संख्या 88 तक ही सीमित दिख रही है।
क्या होगा परिणाम?
सत्ता पक्ष को इस विधेयक के पारित होने का पूरा भरोसा है, जबकि विपक्ष वॉकआउट करने या विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी में है। इस बीच, चर्च ऑफ भारत समेत कुछ अन्य संगठनों ने विधेयक को समर्थन देने की घोषणा की है।
अब सवाल यह है कि क्या यह विधेयक आज आसानी से पारित हो जाएगा, या फिर सदन में कोई नया मोड़ देखने को मिलेगा?
Share this content:
