April 20, 2026

प्रतापगढ़ में नर्सिंगकर्मी की संदिग्ध मौत: गैंगरेप और हत्या के आरोप, पुलिस पर पथराव

प्रतापगढ़ के रानीगंज थाना क्षेत्र के दुर्गागंज बाजार में गुरुवार रात एक नर्सिंगकर्मी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गैंगरेप और हत्या का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची। हालात तब और बिगड़ गए जब गुस्साए लोगों ने पुलिस पर पथराव कर दिया, जिसमें क्षेत्राधिकारी (सीओ) का सिर फूट गया और कुल 13 लोग घायल हो गए।

मौत के बाद शव घर छोड़कर भागे अस्पतालकर्मी

मृतका की मां ने बताया कि उनकी बेटी पिछले चार वर्षों से दुर्गागंज बाजार स्थित मां मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में कार्यरत थी। गुरुवार शाम करीब छह बजे वह ड्यूटी पर गई थी, लेकिन रात में आठ बजे परिवार को अस्पताल से फोन आया कि वह तुरंत वहां पहुंचे। जब मृतका की मां अस्पताल पहुंचीं, तो उन्हें गेट पर ही रोक दिया गया और थोड़ी देर बाद बताया गया कि उनकी बेटी की मौत हो गई है।

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने मामले को दबाने के लिए रात के अंधेरे में शव को एंबुलेंस में डालकर घर भिजवा दिया। शव को देख परिजन तब हैरान रह गए जब उन्होंने पाया कि मृतका के शरीर पर अंडरगार्मेंट नहीं थे, जिससे उन्हें संदेह हुआ कि उनकी बेटी के साथ दुष्कर्म किया गया और फिर हत्या कर दी गई।

गुस्साए परिजनों ने अस्पताल के बाहर शव रखकर किया प्रदर्शन

रातभर पुलिस से कोई संतोषजनक जवाब न मिलने के कारण शुक्रवार सुबह परिजनों ने मृतका का शव चारपाई पर रखकर अस्पताल के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया। धीरे-धीरे बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।

हालात बिगड़ने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश करने लगी। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हो गई, जिसके बाद अचानक पथराव शुरू हो गया। पत्थर लगने से सीओ का सिर फूट गया और 13 लोग घायल हो गए।

पुलिस लाठीचार्ज और सीसीटीवी जांच में जुटी

पथराव के बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए, जिसके चलते पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया। इससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई और बाजार बंद हो गया।

पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज की मदद से पथराव करने वालों की पहचान करने में जुटी है। वहीं, मृतका की मां की शिकायत पर अस्पताल संचालक समेत छह लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सवालों के घेरे में अस्पताल प्रशासन

यह मामला कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यदि यह प्राकृतिक मौत थी, तो अस्पताल प्रशासन ने शव को चोरी-छिपे घर क्यों पहुंचाया? क्यों मृतका के शरीर पर अंडरगार्मेंट नहीं थे? क्या यह अस्पताल में कार्यरत किसी कर्मचारी की करतूत थी?

फिलहाल, पुलिस हर एंगल से मामले की जांच कर रही है, लेकिन स्थानीय लोग न्याय की मांग को लेकर अब भी आक्रोशित हैं। प्रशासन के लिए यह मामला न केवल कानून व्यवस्था की परीक्षा बन चुका है, बल्कि अस्पतालों में सुरक्षा और नैतिकता के मानकों पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रहा है।

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