April 17, 2026

लखनऊ: रिहैब सेंटर में 20 बच्चों की तबियत बिगड़ी, दो की मौत, फूड पॉइजनिंग की आशंका

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक रिहैबिलिटेशन सेंटर में मंगलवार की शाम एक बड़ी घटना सामने आई है, जिसमें 20 से अधिक स्पेशल बच्चों की अचानक तबियत बिगड़ गई। इन बच्चों को तुरंत अस्पताल में दाखिल कराया गया, लेकिन अफसोस की बात है कि दो बच्चों को मृत घोषित कर दिया गया। वहीं, 16 अन्य बच्चों की हालत नाजुक बनी हुई है और उन्हें इलाज के लिए लोकबंधु अस्पताल रैफर किया गया है। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई है और मामले की गंभीरता से जांच शुरू कर दी है।

शाम के खाने के बाद बच्चों की तबियत बिगड़ी

सूत्रों के मुताबिक, बच्चों की तबियत शाम के खाने के बाद बिगड़ी, जिसमें यह बताया जा रहा है कि उन्हें दिन का बचा हुआ खाना परोसा गया था। अत्यधिक गर्मी के कारण इस खाने में दूषित होने की संभावना जताई जा रही है, जिसके बाद बच्चों के बीच बीमारियों के लक्षण तेजी से फैलने लगे। बच्चों के अचानक बीमार होने का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन डॉक्टरों और अधिकारियों की ओर से यह आशंका जताई जा रही है कि बच्चों को फूड पॉइजनिंग हो सकती है।

मृतकों की पहचान और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

मृत बच्चों की पहचान 13 वर्षीय दो बालिकाओं के रूप में हुई है, जिनकी मौत मंगलवार और बुधवार को हुई। दोनों बच्चों की उम्र लगभग 13 साल थी, और उनकी मौत के कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। पोस्टमार्टम के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चलेगा और इसके बाद प्रशासन द्वारा कार्रवाई की जाएगी।

अस्पताल में भर्ती बच्चों की स्थिति गंभीर

घटना के बाद से इन बच्चों को इलाज के लिए विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। 16 बच्चों को लोकबंधु अस्पताल और कुछ को बलरामपुर अस्पताल एवं ट्रॉमा सेंटर में भी भर्ती किया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक, 5 बच्चों की स्थिति में सुधार आया है और उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया है, लेकिन 16 अन्य बच्चों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है, और उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया है। बच्चों के इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पूरी ताकत लगा दी है और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

सैंपल की जांच में होगी सच्चाई का खुलासा

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी अस्पताल पहुंच गए हैं और बच्चों से पूछताछ की है। हालांकि, अब तक इस मामले पर कोई भी अधिकारी आधिकारिक रूप से कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। खाद्य सुरक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रिहैबिलिटेशन सेंटर से खाना के सैंपल भी एकत्रित किए हैं। इन सैंपलों की जांच रिपोर्ट के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

रिहैब सेंटर में कुल 147 बालिकाएं

डीपीओ विकास सिंह ने बताया कि इस रिहैब सेंटर में कुल 147 बालिकाएं रह रही थीं, जिनमें प्रमुख रूप से अनाथ और मानसिक रूप से कमजोर बालिकाओं को भर्ती किया जाता है। इस हादसे में मृत हुई दोनों बालिकाओं की उम्र लगभग 13 साल थी और उनकी मौत के कारण का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही होगा। प्रशासन ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है और इस घटना की सच्चाई सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रशासन ने जांच के लिए कमेटी का गठन किया

घटना के बाद, जिलाधिकारी लखनऊ ने इस मामले की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) करेंगे। इस कमेटी को घटना की तह तक जाकर पूरी घटना की जांच करने और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस घटना के बाद ऐसे मामलों में त्वरित और सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा पर उठे सवाल

इस घटना के बाद, समाज में सवाल उठने लगे हैं कि क्या इस रिहैबिलिटेशन सेंटर में बच्चों की सुरक्षा के उपायों को लेकर कोई लापरवाही बरती गई है? बच्चों की तबियत बिगड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बावजूद दो बच्चों की मौत हो जाना इस बात का संकेत है कि इस घटना में किसी न किसी तरह की प्रशासनिक लापरवाही या प्रक्रिया में गड़बड़ी रही हो सकती है। इस घटना ने एक बार फिर से सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

समाप्ति के बाद की स्थिति

यह घटना लखनऊ में बच्चों की सुरक्षा और देखभाल के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। हालांकि प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन इस घटना से प्रभावित परिवारों के लिए यह किसी बड़े शॉक से कम नहीं है। यह घटना उस रिहैबिलिटेशन सेंटर की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़ा करती है, जो बच्चों की देखभाल के लिए जिम्मेदार था।

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