April 20, 2026

भारत और संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत के बीच म्यांमार की स्थिति पर गहरी चर्चा, सीमा स्थिरता और शरणार्थियों की समस्या पर बनी सहमति

नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस जयशंकर और संयुक्त राष्ट्र महासचिव की विशेष दूत जूली बिशप ने मंगलवार को म्यांमार में तेजी से बदल रहे हालात पर महत्वपूर्ण चर्चा की। यह बैठक दिल्ली में हुई, जहां दोनों नेताओं ने म्यांमार के राजनीतिक संकट, सीमा स्थिरता, शरणार्थियों की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय अपराधों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

सैन्य तख्तापलट के बाद बढ़ी अस्थिरता

म्यांमार में 1 फरवरी 2021 को हुए सैन्य तख्तापलट के बाद से देश में लोकतंत्र की बहाली के लिए बड़े पैमाने पर हिंसक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। यह संघर्ष म्यांमार के सीमावर्ती इलाकों में हिंसा और अस्थिरता का कारण बन चुका है, जिसके चलते देश में शरणार्थियों की संख्या में इजाफा हुआ है। इस संदर्भ में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जनवरी में म्यांमार से लगी भारतीय सीमा पर बाड़ लगाने की योजना की घोषणा की थी।

जयशंकर और जूली बिशप की मुलाकात

इस संदर्भ में, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को दिल्ली में जूली बिशप से मुलाकात की और म्यांमार के लिए भारतीय दृष्टिकोण को साझा किया। उन्होंने बताया कि बैठक के दौरान सीमा स्थिरता, म्यांमार से बाहर होने वाले अंतरराष्ट्रीय अपराध, शरणार्थियों की स्थिति और आर्थिक सहायता प्रदान करने के मुद्दों पर चर्चा की गई। जयशंकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस मुलाकात के बारे में पोस्ट करते हुए कहा, “आज शाम म्यांमार के लिए संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत जूली बिशप से मिलकर खुशी हुई। हमनें सीमा पर स्थिरता, शरणार्थियों की स्थिति, म्यांमार से हो रहे अंतरराष्ट्रीय अपराधों और देश को आर्थिक सहायता प्रदान करने के बारे में चर्चा की। साथ ही राजनीतिक स्थिति पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ।”

संयुक्त राष्ट्र द्वारा विशेष दूत नियुक्ति

यह मुलाकात विशेष महत्व रखती है क्योंकि पिछले साल अप्रैल में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने जूली बिशप को म्यांमार के लिए विशेष दूत नियुक्त किया था। बिशप का उद्देश्य म्यांमार में हो रहे राजनीतिक और मानवीय संकट को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ समन्वय स्थापित करना और समाधान के रास्ते खोजने में मदद करना है।

भारत और म्यांमार के द्विपक्षीय संबंध

भारत और म्यांमार के बीच द्विपक्षीय संबंधों पर भी इस बैठक के दौरान चर्चा हुई। इस साल फरवरी में, दोनों देशों के नेताओं ने फार्मास्यूटिकल्स, दालों और बीन्स, पेट्रोलियम उत्पादों के व्यापार और हाल ही में शुरू किए गए रुपया-क्यात व्यापार निपटान तंत्र को बढ़ावा देने के लिए संभावनाओं पर बातचीत की थी। इन पहलुओं के माध्यम से भारत और म्यांमार के बीच आपसी विकास को प्रोत्साहित किया जा सकता है।

द्विपक्षीय व्यापार और सीमा व्यापार की अहमियत

बैठक के दौरान केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद और म्यांमार के वाणिज्य मंत्रालय के उप मंत्री महामहिम यू मिन मिन ने भी भाग लिया। इस दौरान दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने के लिए विभिन्न पहलुओं पर विचार किया और सीमा व्यापार को फिर से शुरू करने की जरूरत पर जोर दिया। दोनों देशों के नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि सड़क मार्ग से सीमा व्यापार को पुनः शुरू करना दोनों देशों के आर्थिक विकास में सहायक साबित हो सकता है।

भारत के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण

यह मुलाकात म्यांमार में जारी संकट के संदर्भ में भारत की रणनीतिक दृष्टिकोण को स्पष्ट करती है। म्यांमार में राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा के कारण उत्पन्न होने वाली समस्याओं का समाधान केवल क्षेत्रीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए ही संभव है। इस दिशा में भारत का सहयोग और योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण होगा, खासकर तब जब म्यांमार से बाहर होने वाले अपराधों और शरणार्थियों के मुद्दे पर गंभीर रूप से विचार किए जा रहे हैं।

आगे का रास्ता

भारत के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह म्यांमार के संकट से उत्पन्न हो रही चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक मंचों पर अपनी सक्रिय भूमिका निभाए। जूली बिशप के साथ हुई बैठक ने दोनों देशों के बीच सहयोग के नए रास्ते खोले हैं और यह भविष्य में क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक सहयोग के लिए सकारात्मक संकेत हो सकते हैं।

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