April 20, 2026

रुपये में आई बड़ी गिरावट, क्या 84 का लेवल टूटेगा? जानें डॉलर और रुपये की जंग का हाल!

भारत में पिछले कुछ दिनों से रुपया डॉलर के मुकाबले तेज़ी से बढ़ रहा था, लेकिन मंगलवार को डॉलर ने अपनी असली ताकत का एहसास करवा दिया। घरेलू करेंसी मार्केट में रुपया डॉलर के मुकाबले 23 पैसे कमजोर होकर 85.84 पर पहुंच गया, जो इस महीने की सबसे बड़ी गिरावट थी। ये गिरावट मुख्य रूप से इंपोर्टर्स द्वारा डॉलर की बढ़ती मांग के कारण हुई, क्योंकि महीने के अंत में अमेरिकी करेंसी की जरूरत ज्यादा हो जाती है।

इससे पहले, रुपये में सात दिनों तक लगातार तेजी देखी गई थी, जिसमें वह डॉलर के मुकाबले डेढ़ प्रतिशत तक मजबूत हो चुका था। इस दौरान उम्मीद जताई जा रही थी कि रुपये की यह रिकवरी लंबे समय तक जारी रहेगी, लेकिन मंगलवार के आंकड़ों ने एक नई तस्वीर पेश की। विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये की गिरावट के पीछे मुख्य कारण लिक्विडिटी की कमी और अमेरिकी रेसिप्रोकल टैरिफ जैसे मुद्दे हैं, जो रुपये के लिए चुनौतियों का कारण बने हुए हैं।

रुपये में आई गिरावट का कारण

रुपया मंगलवार को 85.59 के स्तर पर खुला और धीरे-धीरे गिरते हुए 85.84 पर पहुंच गया, जो पिछले दिन के मुकाबले 23 पैसे की कमी थी। विशेषज्ञों के मुताबिक, विदेशी मुद्रा डीलरों ने बताया कि घरेलू इक्विटी और विदेशी फंड प्रवाह ने रुपये को निचले स्तरों पर सपोर्ट देने की कोशिश की, लेकिन डॉलर की बढ़ती डिमांड और अन्य वैश्विक आर्थिक हालात के कारण रुपया कमजोर हुआ है। सोमवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 37 पैसे बढ़कर 85.61 पर बंद हुआ था, जिससे यह संकेत मिलते हैं कि रुपये में आई रिकवरी कुछ समय के लिए स्थिर हो सकती है।

डॉलर इंडेक्स में भी उछाल

इस बीच, डॉलर की ताकत को मापने वाले अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में भी पिछले कुछ दिनों में तेजी देखी गई है। एक हफ्ते में इसमें 1 फीसदी का इजाफा हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, डॉलर इंडेक्स इस समय 104.31 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले तीन महीनों का उच्चतम स्तर है। वहीं, साल की शुरुआत से अब तक डॉलर इंडेक्स में करीब 4 फीसदी की गिरावट भी देखी जा चुकी है। इस दौरान, वैश्विक तेल बाजार में खाड़ी देशों का कच्चा तेल भी 73.01 डॉलर प्रति बैरल पर स्थिर बना हुआ है।

क्या रुपया और गिर सकता है?

विशेषज्ञों के अनुसार, रुपया और भी गिर सकता है, खासकर महीने के अंत की ओर बढ़ते हुए। फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने कहा कि जैसे-जैसे हम महीने के अंत की ओर बढ़ेंगे, रुपया और भी गिर सकता है, जब तक भारतीय रिजर्व बैंक के पास इस स्थिति को सुधारने के लिए कोई अन्य योजना न हो। उन्होंने यह भी कहा कि अगर 85.50 के स्तर को पार कर जाता है, तो हम 84.75 के स्तर तक भी गिरावट देख सकते हैं।

क्या रुपये को मिलेगा सपोर्ट?

हालांकि, घरेलू शेयर बाजार और विदेशी निवेशकों से रुपया को सपोर्ट मिल सकता है। मंगलवार को बीएसई सेंसेक्स 0.88 प्रतिशत बढ़कर 78,668.14 अंक पर पहुंचा, जबकि निफ्टी भी 0.79 प्रतिशत बढ़कर 23,844.25 अंक पर था। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने सोमवार को शुद्ध आधार पर 3,055.76 करोड़ रुपये मूल्य की इक्विटी खरीदी थी, जो रुपये के लिए सहायक हो सकती है।

क्या 84 के स्तर तक पहुंचेगा रुपया?

अब सवाल यह उठता है कि क्या रुपया 84 के स्तर तक गिर सकता है? कई विशेषज्ञों का मानना है कि अगर रुपया 85.50 के स्तर को और नीचे गिरता है तो 84.75 के करीब पहुंच सकता है। हालांकि, इसमें समय लगेगा और रिजर्व बैंक की नीतियों का प्रभाव भी देखना होगा।

कुल मिलाकर, रुपये और डॉलर की जंग अभी जारी है, और आने वाले दिनों में रुपये की स्थिति को लेकर कई अहम सवाल खड़े हो सकते हैं।

अब देखना यह है कि भारतीय रिजर्व बैंक इस स्थिति से निपटने के लिए क्या कदम उठाता है और क्या रुपये को फिर से मजबूती मिलती है।

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