ठाणे के प्रतिष्ठित धर्मार्थ ट्रस्ट में बड़ा फेरबदल: कोर्ट ने हटाए पुराने ट्रस्टी, 11 नए सदस्यों की नियुक्ति – आखिर क्यों लिया गया इतना सख्त फैसला?
ठाणे जिले में स्थित भीमेश्वर सदगुरु नित्यानंद संस्था में बड़े प्रशासनिक बदलाव हुए हैं। वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक खामियों के आरोपों के बाद भिवंडी जिला न्यायालय ने ट्रस्ट के पुराने ट्रस्टियों को फिर से नियुक्त करने से इनकार कर दिया और 11 नए ट्रस्टियों की नियुक्ति का आदेश दिया। इस फैसले ने ट्रस्ट के कामकाज और भविष्य की दिशा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
भीमेश्वर सदगुरु नित्यानंद संस्था गणेशपुरी में स्थित एक पंजीकृत धर्मार्थ ट्रस्ट है, जो बॉम्बे पब्लिक ट्रस्ट अधिनियम, 1950 के तहत संचालित होता है। ट्रस्ट में ट्रस्टियों का कार्यकाल पांच साल का होता है और कार्यकाल पूरा होने पर जिला न्यायालय द्वारा नए ट्रस्टियों की नियुक्ति की जाती है।
2016 में नियुक्त हुए ट्रस्टियों का कार्यकाल 16 नवंबर 2021 को समाप्त हो गया था। हालांकि, नए ट्रस्टियों की नियुक्ति में देरी के कारण पुरानी व्यवस्था ही जारी रही। इस बीच, वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक खामियों की कई शिकायतें सामने आने लगीं, जिससे ट्रस्ट पर सवाल उठने लगे।
क्या थे आरोप और क्यों बढ़ी मुश्किलें?
चैरिटी कमिश्नर की एक जांच रिपोर्ट में सामने आया कि ट्रस्ट के कई पुराने ट्रस्टियों के खिलाफ वित्तीय कुप्रबंधन, अनियमितता, कदाचार और अनादर के आरोप लगे हैं।
2019-20 और 2020-21 के वित्तीय वर्ष के लिए कई ट्रस्टी ऑडिट रिपोर्ट और वित्तीय विवरण जमा करने में असफल रहे।
ग्रामीणों, ट्रस्ट कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों ने भी ट्रस्ट प्रशासन की पारदर्शिता को लेकर गंभीर चिंताएं जाहिर की थीं।
जांच में पाया गया कि ट्रस्ट का संचालन सही ढंग से नहीं हो रहा था, जिससे इसकी साख और सामाजिक उद्देश्य प्रभावित हो रहे थे।
कोर्ट ने क्यों लिया सख्त फैसला?
भिवंडी के जिला न्यायाधीश एन.के. करांडे ने अपने आदेश में कहा कि ट्रस्ट के प्रभावी प्रशासन और विकास के लिए नए ट्रस्टियों की नियुक्ति जरूरी है। अदालत ने माना कि जब तक पुराने ट्रस्टियों के खिलाफ चल रही जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक उन्हें फिर से नियुक्त नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने इस फैसले से पहले एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर ट्रस्ट में शामिल होने के लिए आवेदन मांगे। इसके बाद जो प्रक्रिया अपनाई गई, वह असाधारण रूप से कठोर थी।
कैसे हुई नए ट्रस्टियों की चयन प्रक्रिया?
न्यायालय को 152 आवेदन प्राप्त हुए, जिनकी कई चरणों में कड़ी जांच की गई। कोर्ट ने आवेदकों की पृष्ठभूमि और योग्यता का बारीकी से आकलन किया।
आपराधिक रिकॉर्ड की जांच
आवासीय प्रमाण पत्र
चरित्र प्रमाण पत्र
फिटनेस सर्टिफिकेट
अन्य हलफनामों और शपथ पत्रों की समीक्षा
इस विस्तृत जांच के बाद न्यायालय ने 75 आवेदकों को योग्य माना और उनमें से 11 नए ट्रस्टियों का चयन किया।
कौन हैं नए ट्रस्टी?
कड़ी चयन प्रक्रिया के बाद कोर्ट ने जिन 11 नए ट्रस्टियों को नियुक्त किया है, उनके नाम इस प्रकार हैं:
1. सुनील ज्ञानोबा पोटे
2. जगन्नाथ पोसो पाटिल
3. अनुजा अमोल सिंगलवार
4. नयन सिंह जतन सिंह ठाकोर
5. उदय ईश्वरलाल व्यास
6. रवींद्र चंदूलाल शुक्ला
7. विट्ठल मोहन राजपूत
8. ललिता नितान जोशी
9. अमित किसन राउत
10. आनंद प्रभाकर अन्वेकर
11. सुगंधा सचिन जाधव
क्या होगा अब ट्रस्ट का भविष्य?
नए ट्रस्टियों के चयन के साथ ही अब उम्मीद की जा रही है कि भीमेश्वर सदगुरु नित्यानंद संस्था में प्रशासनिक पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन बहाल होगा।
कोर्ट के इस सख्त कदम से साफ संकेत मिलता है कि धर्मार्थ ट्रस्टों के मामलों में अब भ्रष्टाचार और अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि—क्या नए ट्रस्टियों के आने से ट्रस्ट में सबकुछ सही हो जाएगा, या पुराने आरोपों की जांच में और भी बड़े खुलासे होंगे?
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