April 20, 2026

किडनी की समस्या का बढ़ता संकट: बच्चों और किशोरों में हो रही है तेजी से वृद्धि!

देश में हाल के दिनों में किडनी संबंधित बीमारियों में तेजी से वृद्धि हो रही है, खासकर बच्चों और किशोरों के बीच। दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. हिमांशु महापात्रा ने टीवी9 भारतवर्ष से खास बातचीत में इस बढ़ते संकट पर चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि पारंपरिक रूप से किडनी की समस्याएं उम्रदराज़ लोगों में अधिक देखी जाती थीं, लेकिन अब बच्चों और किशोरों में भी इन समस्याओं की संख्या में भारी वृद्धि हो रही है।

क्या कहते हैं आंकड़े?
डॉ. हिमांशु ने किडनी से जुड़ी समस्याओं के आंकड़ों पर रोशनी डालते हुए बताया कि 2011 से 2017 के बीच किडनी डिजीज के मामलों में 11.2% की बढ़ोत्तरी हुई, जबकि 2018 से 2023 के बीच यह वृद्धि 16.38% तक पहुँच गई। यह आंकड़े एक गंभीर स्थिति को दर्शाते हैं, जो बच्चों और किशोरों में तेजी से बढ़ रही किडनी समस्याओं का संकेत देते हैं।

ग्रामीण और शहरी इलाकों का फर्क
नेफ्रोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) का असर ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी क्षेत्रों से कहीं अधिक देखने को मिल रहा है। ग्रामीण इलाकों में 15.34% लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं, जबकि शहरी इलाकों में यह आंकड़ा 10.65% है। इससे साफ जाहिर होता है कि क्रॉनिक किडनी डिजीज की समस्या ग्रामीण इलाकों में कहीं अधिक गंभीर हो सकती है।

क्या कारण हैं?
डॉ. हिमांशु ने बताया कि किडनी से जुड़ी समस्याओं का मुख्य कारण खराब जीवनशैली और गलत आदतें हैं। बच्चों और किशोरों में असंतुलित खानपान, बढ़ती ओबेसिटी (मोटापा) और कम शारीरिक गतिविधि किडनी को अधिक काम करने पर मजबूर कर रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जब कोई बच्चा मोटापे का शिकार हो जाता है, तो उसकी किडनी को अतिरिक्त काम करना पड़ता है, जिससे किडनी पर अत्यधिक दबाव बढ़ता है और वह धीरे-धीरे खराब होने लगती है।

बचाव के उपाय
डॉ. हिमांशु ने इस बढ़ती समस्या से बचाव के कुछ आसान उपाय भी बताए। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति रोजाना तीन लीटर पानी पीता है और पांच हजार कदम प्रतिदिन चलता है, तो उसे किडनी से जुड़ी बीमारियों से बचने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, सही खानपान और नियमित शारीरिक व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से किडनी संबंधित समस्याओं को रोका जा सकता है। उनका मानना है कि साधारण खानपान और एक्सरसाइज से क्रॉनिक बीमारियों से बचाव संभव है।

निष्कर्ष
किडनी की बीमारियाँ अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बच्चों और किशोरों के लिए भी यह एक गंभीर खतरा बनती जा रही हैं। डॉ. हिमांशु के अनुसार, खराब लाइफस्टाइल और खानपान से बचाव करना, साथ ही नियमित शारीरिक व्यायाम करना, इस बढ़ते संकट से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका है। ऐसे में यह जरूरी है कि हम अपनी आदतों को बदलें और किडनी को बचाने के लिए सही कदम उठाएं।

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