June 11, 2026

कांग्रेस ने 2027 चुनाव के लिए यूपी में बिछाई सियासी बिसात, राहुल गांधी के एजेंडे पर नई टीम

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी अभी से शुरू हो गई है, और कांग्रेस ने अपनी सियासी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। गुरुवार को यूपी कांग्रेस कमेटी ने 133 जिलों और शहरों के अध्यक्षों के नाम का ऐलान किया, जिसके साथ पार्टी ने 2027 के चुनाव की दिशा तय करने का एक बड़ा कदम उठाया। इन नए पदाधिकारियों के चयन में राहुल गांधी के सामाजिक न्याय वाले एजेंडे को प्राथमिकता दी गई है, ताकि पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों को सशक्त किया जा सके।

राहुल गांधी के सामाजिक न्याय एजेंडे पर बड़ा दांव

2024 के लोकसभा चुनावों के बाद, कांग्रेस ने यूपी में अपना संगठन पूरी तरह से भंग कर दिया था और फिर से पुनर्गठन का फैसला लिया। अब, 133 नए जिलाध्यक्षों और महानगर अध्यक्षों की घोषणा के साथ, पार्टी ने सामाजिक न्याय, विशेष रूप से पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों को अपने संगठन में प्रमुख स्थान दिया है। करीब 65% नए पदाधिकारी ओबीसी, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय से हैं, जो पार्टी के लिए नया सामाजिक समीकरण तैयार कर सकते हैं। इस बदलाव के माध्यम से कांग्रेस ने राहुल गांधी के सामाजिक न्याय के एजेंडे को व्यावहारिक रूप में उतारने की कोशिश की है।

ब्राह्मण समाज पर कांग्रेस की नजर

कांग्रेस ने अपने संगठन में सवर्ण समाज को भी विशेष स्थान दिया है, जिसमें ब्राह्मण समाज से 27 पदाधिकारी शामिल हैं। इसके बाद ठाकुर समाज का नंबर आता है, जिनसे 12 अध्यक्ष बनाए गए हैं। इस रणनीति के तहत कांग्रेस ने 35% सवर्णों को अपनी पार्टी में शामिल किया है, खासतौर से ब्राह्मण समाज को 19% की हिस्सेदारी दी गई है। यह कदम कांग्रेस के लिए अपनी पुरानी ब्राह्मण वोटो की खोई हुई जमीन को फिर से पाने की एक कोशिश माना जा रहा है।

पीडीए फार्मूले पर फोकस

पार्टी ने जिला और शहर अध्यक्षों के चयन में पीडीए फार्मूले का भी पालन किया है। इस फार्मूले के तहत कांग्रेस ने पिछड़े वर्ग, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय को 65% स्थान दिया है। ओबीसी वर्ग के 48 सदस्य, दलित वर्ग के 20 और मुस्लिम समुदाय के 32 सदस्य अब पार्टी के जिला और शहर अध्यक्ष के रूप में कार्य करेंगे। राहुल गांधी के सोशल इंजीनियरिंग के इस प्रयास को यूपी की राजनीति में एक नई दिशा देने के रूप में देखा जा सकता है।

प्रियंका गांधी की टीम पर ध्यान

कांग्रेस की इस नई सूची में प्रियंका गांधी की टीम का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। कई जिलों और शहरों के अध्यक्ष प्रियंका गांधी के करीबी नेताओं को नियुक्त किया गया है, जो 2022 के चुनावों में भी पार्टी के साथ जुड़े थे। मथुरा, आगरा और लखनऊ जैसे महत्वपूर्ण शहरों में प्रियंका गांधी के समर्थक नेता पदों पर आसीन हुए हैं। इससे पार्टी में प्रियंका गांधी की बढ़ती शक्ति और उनका प्रभाव भी झलकता है।

युवा नेताओं को दिया गया प्रमुख स्थान

कांग्रेस ने संगठन में युवाओं को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया है। 133 नवनियुक्त अध्यक्षों में से 84 नेता 21 से 50 साल की उम्र के हैं। यह दर्शाता है कि कांग्रेस ने 2027 के चुनावों के लिए युवा चेहरों को आगे बढ़ाने की तैयारी की है। इससे यह उम्मीद जताई जा रही है कि कांग्रेस एक नई युवा टीम के साथ आगामी चुनावी मैदान में उतरेगी, जो पार्टी की सियासी जमीन को फिर से मजबूत कर सकेगी।

क्या कांग्रेस UP में अपनी खोई हुई जमीन वापस पा पाएगी?

कांग्रेस का यह कदम यूपी में 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए अपनी रणनीति को मजबूत करने का प्रयास है। हालांकि, यह देखना होगा कि राहुल गांधी के सामाजिक न्याय एजेंडे पर आधारित इस नई टीम का कितनी सफलता मिलती है। वहीं, सपा और भाजपा की सियासी ताकत को देखते हुए, कांग्रेस को अपनी खोई हुई जमीन को वापस पाने के लिए लंबा और कठिन रास्ता तय करना होगा।

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