April 20, 2026

सदन में मोबाइल? बाहर निकालिए!” – विधानसभा में भड़के सीएम नीतीश, स्पीकर को भी सुनाया!

 विधानसभा में गुरुवार को एक अनोखा नजारा देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सदन के भीतर मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति जताई। आमतौर पर शांत स्वभाव के माने जाने वाले नीतीश कुमार इस बार अपने गुस्से को नहीं रोक पाए और खुद विधानसभा अध्यक्ष नंदकिशोर यादव से मोबाइल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग कर डाली।

सदन में मोबाइल लेकर क्यों आते हैं?” – नीतीश कुमार की नाराजगी

विधानसभा की कार्यवाही के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने देखा कि कुछ विधायक अपने मोबाइल फोन में व्यस्त थे। यह नज़ारा उन्हें इतना नागवार गुज़रा कि उन्होंने सदन में ही सख्त लहजे में आपत्ति जताई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सदन की कार्यवाही के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल अनुचित है और इसे पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।

नीतीश कुमार ने विधानसभा अध्यक्ष नंदकिशोर यादव से सीधे आग्रह करते हुए कहा –

“मोबाइल पर बात कर रहा है… यह कोई बात नहीं है! अध्यक्ष जी, आप कहिए कोई मोबाइल लेकर नहीं आए! कोई मोबाइल लेकर आएगा, उनको बाहर निकाल दिया जाएगा!”

मोबाइल प्रतिबंध के प्रस्ताव से सदन में हड़कंप

मुख्यमंत्री की इस कड़ी टिप्पणी के बाद विधानसभा में हलचल मच गई। कई सदस्य असहज नजर आने लगे, क्योंकि कई विधायक सदन में मोबाइल लेकर आए थे। नीतीश कुमार का गुस्सा इतना तेज था कि उन्होंने आगे कहा –

“पहले हम भी मोबाइल इस्तेमाल करते थे, लेकिन अब छोड़ दिया है। सदन में अनुशासन होना चाहिए, न कि मोबाइल पर बातचीत या इंटरनेट सर्फिंग!”

उनकी इस टिप्पणी ने पूरे सदन का माहौल बदल दिया। कुछ विधायकों ने तो तुरंत ही अपने मोबाइल फोन जेब में रख लिए, तो कुछ चुपचाप उन्हें बंद करने लगे।

क्या वाकई विधानसभा में मोबाइल पर लगेगा प्रतिबंध?

बिहार विधानसभा में पहले भी मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन यह पहली बार है जब मुख्यमंत्री ने खुद इस मुद्दे को इतने कड़े शब्दों में उठाया। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विधानसभा अध्यक्ष इस पर क्या कदम उठाते हैं। अगर विधानसभा में मोबाइल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाता है, तो यह अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।

सदन की गरिमा या डिजिटल युग की जरूरत?

मोबाइल फोन पर प्रतिबंध की यह मांग दो पक्षों में बंटती दिख रही है। एक तरफ वे लोग हैं जो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बात का समर्थन कर रहे हैं और मानते हैं कि विधानसभा जैसी गरिमामयी जगह पर मोबाइल फोन का इस्तेमाल अनुशासनहीनता को दर्शाता है। दूसरी ओर, कुछ विधायकों का कहना है कि डिजिटल युग में मोबाइल फोन एक आवश्यक उपकरण बन चुका है और कई बार महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों की जरूरत पड़ती है, जो मोबाइल के जरिए आसानी से देखे जा सकते हैं।

इतना तय है कि अब विधायकों को सदन में मोबाइल इस्तेमाल करने से पहले दो बार सोचना पड़ेगा!

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